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मध्यप्रदेश में छात्रसंघ चुनाव की तैयारी, नौ साल बाद मिली मंजूरी

मध्यप्रदेश में लगभग नौ साल बाद छात्रसंघ चुनाव का आयोजन संभव हो गया है। उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में सितंबर में चुनाव कराए जाएं। याचिका में आरोप लगाया गया था कि चुनाव नहीं कराए जा रहे हैं, जबकि विद्यार्थियों से शुल्क लिया जा रहा है। जानें इस महत्वपूर्ण निर्णय के पीछे की कहानी और चुनाव प्रक्रिया के लिए अदालत के निर्देश।
 

छात्रसंघ चुनाव का रास्ता साफ

जबलपुर, चार अगस्त: मध्यप्रदेश में लगभग नौ वर्षों के बाद छात्रसंघ चुनाव का आयोजन संभव हो गया है। राज्य सरकार ने सोमवार को उच्च न्यायालय को शैक्षणिक कैलेंडर प्रस्तुत करते हुए बताया कि सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में सितंबर में छात्रसंघ चुनाव होंगे। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की पीठ ने उच्च शिक्षा विभाग द्वारा दी गई जानकारी को रिकॉर्ड में लेते हुए जनहित याचिका का निपटारा किया।


याचिका में उठाए गए मुद्दे

याचिका में यह आरोप लगाया गया था कि छात्रसंघ चुनाव के नाम पर विद्यार्थियों से शुल्क लिया जा रहा है, लेकिन चुनाव नहीं कराए जा रहे हैं। छात्र नेता अदनान अंसारी द्वारा दायर जनहित याचिका में कहा गया कि राज्य के सरकारी उच्च शिक्षण संस्थानों में 2017 से छात्रसंघों का गठन ठप है, जिससे विद्यार्थियों के लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। इसके अलावा, याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि राज्य सरकार लिंगदोह समिति की सिफारिशों को प्रभावी तरीके से लागू नहीं कर रही है।


उच्च न्यायालय का निर्देश

इस वर्ष जनवरी में उच्च न्यायालय ने सुनवाई के दौरान 2026-27 के छात्रसंघ चुनाव कराने के लिए शैक्षणिक कैलेंडर प्रस्तुत करने का आदेश दिया था। पिछले महीने, राज्य सरकार ने योजना पेश करने के लिए और समय मांगा था, जिसे उसने सोमवार को अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया। सुनवाई के दौरान, राज्य सरकार ने 2026-27 का शैक्षणिक कैलेंडर पेश करते हुए सितंबर में छात्रसंघ चुनाव कराने की जानकारी दी।


चुनाव प्रक्रिया के लिए दिशा-निर्देश

याचिकाकर्ता ने अदालत से अनुरोध किया कि छात्रसंघ चुनाव के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सरकारी विश्वविद्यालयों को आवश्यक पुलिस और प्रशासनिक सहयोग प्रदान करने के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। पीठ ने महाविद्यालयों के प्राचार्यों और विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को निर्देश दिया कि यदि आवश्यक हो, तो पुलिस और प्रशासनिक सहायता प्राप्त करने के लिए आवश्यक कदम उठाएं, ताकि चुनाव प्रक्रिया शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हो सके।