मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला: भोजशाला परिसर को मंदिर घोषित किया गया
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने भोजशाला परिसर को मंदिर के रूप में मान्यता दी है, जिससे हिंदुओं को यहां पूजा करने का अधिकार मिला है। इस ऐतिहासिक फैसले में पुरातात्विक अध्ययन के निष्कर्षों को आधार बनाया गया है। मुस्लिम पक्ष ने इस निर्णय को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देने की योजना बनाई है। अदालत ने वाग्देवी प्रतिमा की वापसी पर भी विचार किया है। इस फैसले का धार्मिक और राजनीतिक दोनों ही पहलुओं पर गहरा प्रभाव पड़ने की संभावना है।
May 15, 2026, 15:17 IST
भोजशाला परिसर का मंदिर के रूप में मान्यता
मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला-कमल मौला परिसर के विवाद में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। न्यायालय ने शुक्रवार को इस परिसर को मंदिर के रूप में मान्यता दी और हिंदुओं को यहां पूजा करने का अधिकार प्रदान किया। न्यायालय ने कहा कि पुरातत्व विज्ञान पर आधारित निष्कर्षों पर भरोसा किया जा सकता है।
न्यायालय ने अपने निर्णय में सभी पक्षों के संवैधानिक अधिकारों का ध्यान रखा। पीठ ने कहा कि हम उन सभी वकीलों का आभार व्यक्त करते हैं जिन्होंने अदालत की सहायता की। उन्होंने तथ्यों और एएसआई अधिनियम की जांच की। अदालत ने यह भी बताया कि परमार राजा भोज के समय यह स्थल संस्कृत शिक्षा का केंद्र था और देवी सरस्वती को समर्पित एक मंदिर था।
मुस्लिम पक्ष ने कहा कि वे इस फैसले का अध्ययन करेंगे और इसे सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देने की योजना बना रहे हैं। उच्च न्यायालय ने भोजशाला परिसर को संरक्षित स्मारक के रूप में मान्यता दी और हिंदुओं को पूजा का अधिकार दिया। न्यायाधीश ने सुझाव दिया कि सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को परिसर में संस्कृत शिक्षा की व्यवस्था पर विचार करना चाहिए।
अदालत ने वाग्देवी प्रतिमा की वापसी के मुद्दे पर भी विचार किया और केंद्र सरकार से इसे भारत वापस लाने और मंदिर में स्थापित करने के लिए कदम उठाने का आग्रह किया। इस फैसले के धार्मिक और राजनीतिक दोनों पहलुओं पर गहरा प्रभाव पड़ने की संभावना है।
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