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मध्य पूर्व में तनाव: अमेरिका का ईरान के क़ेशम द्वीप पर हमला

मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है, जब अमेरिका ने ईरान के क़ेशम द्वीप पर हमले किए। इस कार्रवाई के जवाब में कुवैत और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर हमले हुए। दोनों पक्षों के अधिकारी कूटनीतिक वार्ता के प्रयास कर रहे हैं, लेकिन यह नई शत्रुता वार्ता को प्रभावित कर सकती है। जानें क़ेशम द्वीप का महत्व और इस संघर्ष का नागरिकों पर प्रभाव।
 

मध्य पूर्व में तनाव की नई लहर

मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहा संघर्षविराम खतरे में पड़ गया है, जब अमेरिकी सेना ने ईरान के क़ेशम द्वीप पर हमले किए। इस कार्रवाई के जवाब में कुवैत और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलों और ड्रोन से हमले किए गए। दोनों पक्षों के अधिकारी कूटनीतिक वार्ता के माध्यम से स्थिति को सामान्य करने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन यह नई शत्रुता वार्ता को प्रभावित कर सकती है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, वायुसेना ने शनिवार और रविवार को ईरान के गेरुक शहर और क़ेशम द्वीप पर हवाई हमले किए।


अमेरिकी हमले का विवरण

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बताया कि उन्होंने ईरान में गेरुक शहर के पास और क़ेशम द्वीप पर हमले किए। इन हमलों में हवाई रक्षा प्रणालियों, एक ड्रोन ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन और दो हमलावर ड्रोन को निशाना बनाया गया। ये ड्रोन क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही के लिए खतरा बन रहे थे। CENTCOM के अनुसार, इस ऑपरेशन में एक सक्रिय रडार इंस्टॉलेशन और एक ड्रोन कमांड सुविधा को निष्क्रिय कर दिया गया।


क़ेशम द्वीप का महत्व

क़ेशम द्वीप होर्मुज़ जलडमरूमध्य के निकट स्थित है, जो वैश्विक LNG व्यापार और तेल शिपमेंट के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है। इस जलडमरूमध्य से लगभग 20 प्रतिशत LNG और 25 प्रतिशत तेल शिपमेंट गुजरता है, जिससे यह अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बन जाता है। ईरान इस द्वीप पर तैनात सैन्य संपत्तियों का उपयोग करके इस जलमार्ग पर प्रभाव डाल सकता है।


IRGC का सैन्य ढांचा

विश्लेषकों के अनुसार, क़ेशम को ईरान का 'न डूबने वाला विमानवाहक पोत' कहा जाता है, क्योंकि यहाँ एक व्यापक सैन्य बुनियादी ढांचा मौजूद है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने द्वीप पर भूमिगत मिसाइल सुविधाओं और रक्षात्मक ठिकानों का एक नेटवर्क तैयार किया है।


नागरिकों पर प्रभाव

संघर्ष के प्रारंभिक चरण में, हवाई हमलों ने द्वीप पर एक प्रमुख विलवणीकरण संयंत्र को नष्ट कर दिया, जिससे लगभग 30 गांवों में ताजे पानी की आपूर्ति बाधित हो गई। यह स्थिति मानवीय संकट को उजागर करती है।