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मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट ने रोहित चतुर्वेदी की समय से पहले रिहाई को दी मंजूरी

सुप्रीम कोर्ट ने मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में दोषी रोहित चतुर्वेदी की समय से पहले रिहाई की अनुमति दी है। कोर्ट ने उसकी माफी याचिका को स्वीकार करते हुए पूर्व में की गई अस्वीकृति को मनमाना बताया। इस फैसले में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। जानें इस मामले की पूरी कहानी और कोर्ट के निर्णय के पीछे के कारण।
 

सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय

साल 2003 में हुए मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट ने दोषी रोहित चतुर्वेदी को समय से पहले रिहा करने की अनुमति दी है। कोर्ट ने रोहित की माफी याचिका को स्वीकार करते हुए पूर्व में की गई अस्वीकृति को मनमाना करार दिया। जस्टिस बीवी नागरत्ना और उज्ज्वल भुयान की पीठ ने इस फैसले में आपराधिक न्याय में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया।


कोर्ट का निर्णय

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उत्तराखंड सरकार की सिफारिश को खारिज करने वाला गृह मंत्रालय का पत्र कानूनी रूप से अस्थिर था। कोर्ट ने रोहित की हिरासत अवधि और उसकी वर्तमान स्थिति पर भी ध्यान दिया और निर्देश दिया कि उसे फिर से हिरासत में नहीं लिया जाएगा। अदालत ने यह भी कहा कि चूंकि रोहित पहले से ही बाहर है, इसलिए उसे सरेंडर करने की आवश्यकता नहीं है।


मामले का संक्षिप्त विवरण

कवयित्री मधुमिता शुक्ला की हत्या 9 मई 2003 को लखनऊ में हुई थी, जब वह गर्भवती थीं। इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी को सितंबर 2003 में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया।


निचली अदालत और हाई कोर्ट का फैसला

उत्तराखंड की निचली अदालत ने 24 अक्टूबर 2007 को अमरमणि, उनकी पत्नी मधुमणि, रिश्तेदार रोहित चतुर्वेदी और संतोष कुमार राय को हत्या का दोषी पाया और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई। मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। उत्तराखंड हाई कोर्ट ने 16 जुलाई 2012 को इन सभी की दोषसिद्धि और सजा को बरकरार रखा।