मद्रास हाई कोर्ट ने करूर भगदड़ पीड़ितों के परिवारों को नौकरी देने के आदेश को रद्द किया
मद्रास हाई कोर्ट ने करूर भगदड़ के पीड़ितों के परिवारों को नौकरी देने के तमिलनाडु सरकार के आदेश को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने इसे संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन मानते हुए कहा कि इससे अन्य लोगों को भी नौकरी की मांग करने का अवसर मिलेगा। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि वेटिंग लिस्ट में शामिल व्यक्तियों की जरूरतों को नजरअंदाज करना उचित नहीं है। इस निर्णय ने कई नौकरी चाहने वालों के लिए महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर दिए हैं।
Jul 27, 2026, 18:18 IST
कोर्ट का निर्णय
मद्रास हाई कोर्ट ने सोमवार को करूर भगदड़ के प्रभावित परिवारों को नौकरी देने के तमिलनाडु सरकार के फैसले को निरस्त कर दिया। न्यायालय ने कहा कि यह कदम संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन करेगा। इसके अलावा, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इससे अन्य व्यक्तियों को भी ऐसी नौकरियों की मांग करने का अवसर मिलेगा। कोर्ट ने यह भी बताया कि कई अन्य लोग विभिन्न सरकारी विभागों में नौकरी की तलाश में हैं, और करूर भगदड़ में मृतकों के परिवारों को नौकरी देकर अन्य लोगों को नजरअंदाज करना उचित नहीं होगा।
नौकरी की मांग और संविधान
कोर्ट ने यह भी कहा कि यह मुद्दा केवल नौकरी चाहने वालों के लिए ही नहीं, बल्कि वेटिंग लिस्ट में शामिल व्यक्तियों और उन लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण है जिन्होंने नौकरी के दौरान अपने परिवार के सदस्यों को खोया है। जब वेटिंग लिस्ट उपलब्ध है, तो करूर घटना के पीड़ितों के परिवारों को प्राथमिकता देकर अन्य की जरूरतों को नजरअंदाज करना उचित नहीं है। न्यायालय का मानना है कि ये नियुक्तियां संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत नागरिकों को दी गई गारंटी का उल्लंघन करती हैं। जैसा कि 'लाइव लॉ' ने रिपोर्ट किया है।