×

मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि-ईदगाह विवाद पर वार्ता बेनतीजा

मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह के विवाद पर उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर हुई वार्ता बेनतीजा रही। दोनों पक्षों के बीच अगली वार्ता 18 अगस्त को निर्धारित की गई है। यदि इस बार भी कोई समाधान नहीं निकलता है, तो मामला उच्चतम न्यायालय में जाएगा। विवाद के कई पहलुओं पर चर्चा की गई, लेकिन सहमति नहीं बन पाई। जानें इस विवाद की पूरी कहानी और आगे की संभावनाएं।
 

मथुरा विवाद पर वार्ता का नया दौर

उत्तर प्रदेश के मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह के बीच चल रहे विवाद पर उच्चतम न्यायालय के निर्देश के तहत शुक्रवार को हुई वार्ता निष्कर्षहीन रही। अधिवक्ताओं ने शनिवार को इस बात की जानकारी दी। दोनों पक्षों ने विशेष न्यायाधीश (आवश्यक वस्तु अधिनियम) की अदालत में अपनी-अपनी दलीलें प्रस्तुत कीं, लेकिन किसी सहमति पर नहीं पहुंच सके।


अब दोनों पक्षों के बीच अगली वार्ता 18 अगस्त को होगी। यदि इस बार भी कोई सकारात्मक समाधान नहीं निकलता है, तो मामले का निर्णय उच्चतम न्यायालय द्वारा ही होने की संभावना है।


मथुरा में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मस्थान और शाही ईदगाह के बीच विवाद कई वर्षों से चल रहा है। लगभग डेढ़ दर्जन वादकारियों ने खुद को भगवान श्रीकृष्ण का भक्त बताते हुए दावा किया है कि शाही ईदगाह 13.37 एकड़ भूमि पर स्थित है, जो श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट की संपत्ति है। उन्होंने इस भूमि को हिंदू पक्ष को वापस सौंपने का अनुरोध किया है।


इन दावों से संबंधित कई मामले इलाहाबाद उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन हैं।


अधिवक्ताओं ने बताया कि उच्चतम न्यायालय ने इन मामलों को सुलह के माध्यम से हल करने के लिए दोनों पक्षों को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से वार्ता करने का निर्देश दिया था। 4 जुलाई को हिंदू पक्ष ने मुस्लिम पक्ष को ईदगाह को हटाकर अन्य स्थान पर निर्माण के लिए भूमि उपलब्ध कराने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन मुस्लिम पक्ष का कोई प्रतिनिधि वहां उपस्थित नहीं हुआ।


इसके बाद शुक्रवार को वार्ता की नई तारीख तय की गई। हिंदू पक्ष के अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि इस बार भी उन्होंने मुस्लिम पक्ष को अन्यत्र भूमि उपलब्ध कराने और विवादित भूमि को मंदिर न्यास को सौंपने का सुझाव दिया।


वहीं, मुस्लिम पक्ष के प्रतिनिधि और शाही ईदगाह इंतजामिया कमेटी के सचिव अधिवक्ता तनवीर अहमद ने हिंदू पक्ष के प्रस्ताव को अस्वीकार करते हुए 1968 में श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ और इंतजामिया कमेटी के बीच हुए समझौते पर कायम रहने की बात कही।


उन्होंने कहा कि जब मामला उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन है, तो अदालत को ही यह तय करना चाहिए कि किस पक्ष का दावा सही है। ऐसे में समझौता वार्ता की आवश्यकता नहीं है। विशेष न्यायाधीश अरविंद कुमार ने अंतिम प्रयास के तहत एक अन्य विशेष लोक अदालत आयोजित करने का निर्णय लिया है, जिसमें दोनों पक्षों को 18 अगस्त को उपस्थित होकर मामले का समाधान निकालने का अवसर दिया गया है।