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मथुरा में बांके बिहारी मंदिर के विकास के लिए दो संपत्तियों की रजिस्ट्री पूरी

मथुरा में श्री बांके बिहारी जी मंदिर के आसपास जनसुविधाओं के विकास के लिए प्रशासन ने दो संपत्तियों की रजिस्ट्री पूरी की है। इस परियोजना के तहत अब तक 2034.78 वर्ग मीटर भूमि की रजिस्ट्री की जा चुकी है। प्रभावित संपत्ति स्वामियों को उचित मुआवजा और अन्य सुविधाएं दी जा रही हैं। 'पहले आओ, पहले पाओ' योजना के तहत श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित की जाएंगी, जिससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
 

मंदिर क्षेत्र के विकास में नई उपलब्धि

मथुरा: श्री बांके बिहारी जी मंदिर के आस-पास जनसुविधाओं के विकास के लिए प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इस परियोजना के अंतर्गत दो संपत्तियों की रजिस्ट्री सफलतापूर्वक की गई है, जिससे मंदिर क्षेत्र के सुनियोजित विकास में तेजी आई है। जंगल कट्टी मोहल्ले में स्थित भवन संख्या 265 (35 वर्ग मीटर) और भवन संख्या 266 (168.66 वर्ग मीटर) के मालिक शरद बिहारी, शशि बाबू गौड़, रवि भूषण गौड़ और सुभाष गौड़ (पुत्रगण खिलन बिहारी गौड़) ने कुल 203.66 वर्ग मीटर भूमि की रजिस्ट्री तहसीलदार सदर के माध्यम से ठाकुर बांके बिहारी जी के नाम कराई। इस अवसर पर चंद्र प्रकाश सिंह और अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) डॉ. पंकज कुमार वर्मा भी उपस्थित थे।


प्रभावित संपत्ति स्वामियों को मिलने वाली सुविधाएं

जिलाधिकारी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार गठित हाई पावर्ड मैनेजमेंट कमेटी के मार्गदर्शन में यह कार्य लगातार चल रहा है। अब तक कुल 19 बैनामों के माध्यम से लगभग 2034.78 वर्ग मीटर भूमि की रजिस्ट्री की जा चुकी है। प्रभावित संपत्ति स्वामियों को उचित मुआवजा, दुकान के बदले दुकान, मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण द्वारा फ्लैट और यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण की परियोजनाओं में प्लॉट आवंटन जैसी सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं।


“पहले आओ, पहले पाओ” योजना

“पहले आओ, पहले पाओ” के सिद्धांत पर प्राथमिकता तय की गई है, जिससे लोग स्वेच्छा से रजिस्ट्री के लिए आगे आ रहे हैं। जिलाधिकारी ने बताया कि मंदिर क्षेत्र में प्रस्तावित विकास कार्यों के तहत श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित वातावरण, बैठने की व्यवस्था, पेयजल सुविधा और सुगम प्रवेश-निकासी मार्ग तैयार किए जाएंगे। इससे संकरी गलियों में लगने वाली भीड़ को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।


परियोजना के लाभ

प्रशासन का मानना है कि इस परियोजना से न केवल श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि ब्रज क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर उत्पन्न होंगे।


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