मणिपुर में विस्थापितों के पुनर्वास की प्रक्रिया पर सरकार की प्राथमिकता
मणिपुर सरकार की पुनर्वास योजना
मणिपुर सरकार ने बुधवार को स्पष्ट किया कि राज्य में विस्थापित व्यक्तियों का पुनर्वास उसकी प्राथमिकता है और सभी प्रस्तावित स्थलों पर सुरक्षा का गहन मूल्यांकन किया जा रहा है।
विशेष सचिव (गृह) ए. सुभाष सिंह ने विस्थापितों के प्रतिनिधियों और 'मणिपुर इंटीग्रिटी कोऑर्डिनेटिंग कमेटी' को भेजे गए पत्र में बताया कि पुनर्वास प्रक्रिया कई महत्वपूर्ण कारकों पर निर्भर करती है। इनमें सुरक्षा की स्थिति, पुनर्वास स्थलों की तैयारी, भूमि की उपलब्धता, वित्तीय संसाधनों की व्यवस्था, जलवायु की स्थिति और आजीविका के अवसर शामिल हैं।
मई 2023 से मेइती और कुकी समुदायों के बीच हुए जातीय संघर्ष में मणिपुर में कम से कम 260 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और हजारों लोग बेघर हो गए हैं। वर्तमान में राज्य में फरवरी 2025 से राष्ट्रपति शासन लागू है।
पत्र में उल्लेख किया गया है, 'आंतरिक रूप से विस्थापित व्यक्तियों का पुनर्वास हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। यह प्रक्रिया एक बार में या समय-सीमा पर आधारित उपायों के बजाय चरणबद्ध, गतिशील और व्यावहारिक तरीके से लागू की जा रही है।'
सरकार ने बताया कि विभिन्न योजनाओं के तहत लगभग 60,000 विस्थापित व्यक्तियों को शामिल करते हुए एक व्यापक पुनर्वास योजना तैयार की गई है। इस योजना में केवल पुनर्वास ही नहीं, बल्कि विस्थापितों की शिक्षा, आजीविका और समग्र कल्याण पर भी ध्यान दिया गया है।
पत्र के अनुसार, मणिपुर के 2025-26 के बजट में घोषित 523 करोड़ रुपये के पुनर्वास और पुनर्स्थापन पैकेज के तहत चरणबद्ध पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू की गई है। पहले चरण में उन परिवारों का पुनर्वास किया जाएगा जिनके घर आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं।
दूसरे चरण में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) के तहत अपने-अपने जिलों में आवास प्राप्त करने वाले परिवार शामिल हैं, जबकि तीसरे चरण में घाटी और पहाड़ी जिलों के बीच अंतर-जिला पुनर्वास की योजना है। इन सभी के लिए बेहतर समन्वय, बुनियादी ढांचे का विकास और सुरक्षा व्यवस्था की आवश्यकता है।