मणिपुर में परीक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए नया विधेयक पारित
परीक्षा प्रणाली में सुधार का ऐतिहासिक कदम
मणिपुर के मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह ने बताया कि प्रश्नपत्र लीक रोकने के लिए लाए गए विधेयक का पारित होना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो एक पारदर्शी और विश्वसनीय परीक्षा प्रणाली की स्थापना की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह विधेयक लाखों छात्रों की आकांक्षाओं की सुरक्षा करेगा। ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस’ (इंडिया) के घटक दलों के बहिष्कार के बीच लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 को राज्यसभा में ध्वनिमत से मंजूरी मिल गई। यह विधेयक पहले ही लोकसभा में पारित हो चुका था।
मुख्यमंत्री सिंह ने बृहस्पतिवार की रात सोशल मीडिया पर इस विधेयक के पारित होने को ‘एक निष्पक्ष, पारदर्शी और विश्वसनीय परीक्षा प्रणाली की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम’ बताया। उन्होंने कहा, ‘यह सुधार परीक्षाओं की शुचिता को और मजबूत करेगा और लाखों छात्रों की आकांक्षाओं की रक्षा करेगा।’ उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत अपने शिक्षा तंत्र को लगातार सशक्त बना रहा है।
संशोधित विधेयक के अनुसार, परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक या अनुचित साधनों के उपयोग में शामिल व्यक्तियों को न्यूनतम पांच साल और अधिकतम 10 साल तक की जेल की सजा और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। इसी तरह संगठित अपराधों के लिए कम से कम सात साल की कैद और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।