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मणिपुर के सीमावर्ती गांवों पर हमले में दो लोग लापता, सुरक्षा पर उठे सवाल

मणिपुर के कांगजोंग जिले में संदिग्ध म्यांमार आधारित उग्रवादियों द्वारा किए गए हमले में दो लोग लापता हो गए हैं। स्थानीय विधायक ने सुरक्षा में गंभीर चूक का आरोप लगाया है और कहा है कि गांव वालों की चेतावनियों को नजरअंदाज किया गया। हमले के दौरान कई घरों को आग के हवाले किया गया और स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। विधायक ने इसे बाहरी आक्रमण करार दिया है और सुरक्षा बलों की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
 

हमले की जानकारी

हमले के दौरान चोरो, वांगली और नामली के सीमावर्ती गांवों में कई घरों को आग के हवाले किया गया। (फोटो)


इंफाल, 7 मई: मणिपुर के कांगजोंग जिले में संदिग्ध म्यांमार आधारित उग्रवादियों द्वारा किए गए एक प्री-डॉन हमले के बाद दो लोग लापता हो गए हैं। इस घटना के बाद क्षेत्र में तनाव बना हुआ है, जिससे और भी बढ़ने की आशंका है।


लापता व्यक्तियों में 35 वर्षीय चिंग निंगशेन और इंफाल की एक विधवा इटोबी शामिल हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि हमलावरों ने इन दोनों का अपहरण कर लिया होगा।


रिपोर्टों के अनुसार, चोरो, वांगली और नामली गांवों पर सुबह लगभग 3:30 से 4 बजे के बीच समन्वित हमला हुआ।


हमले के दौरान कई घरों को आग लगा दी गई, जबकि कम से कम पांच से छह लोग घायल हुए।


गांवों में स्थिति पूरे दिन तनावपूर्ण रही, जहां निवासियों ने सड़कें जाम कर दीं और कमजोर सीमावर्ती क्षेत्र में सुरक्षा बलों की तैनाती की मांग की।


स्थानीय विधायक की प्रतिक्रिया

फुंग्यार विधायक लेशियो कीशिंग ने इस घटना पर टिप्पणी करते हुए सीमा सुरक्षा में गंभीर चूक का आरोप लगाया और कहा कि गांव वालों की बार-बार की गई चेतावनियों को नजरअंदाज किया गया।


उन्होंने कहा, "सीमावर्ती गांवों के मुखियाओं ने 24 अप्रैल को राज्य सरकार से पर्याप्त सुरक्षा बलों की तैनाती की अपील की थी, क्योंकि उन्हें संभावित हमलों का डर था। लेकिन उनकी चिंताओं को अनसुना कर दिया गया।"


कीशिंग ने इस घटना को "बाहरी आक्रमण" करार दिया और कहा कि इसे सामुदायिक या जातीय दृष्टिकोण से नहीं देखना चाहिए।


उन्होंने कहा, "लोग असहनीय स्तर तक पीड़ित हैं। पहले राज्य आंतरिक जातीय तनाव का सामना कर रहा था, लेकिन 7 मई से हम बाहरी आक्रमण का सामना कर रहे हैं।"


सुरक्षा की स्थिति

उन्होंने यह भी कहा कि सीमा सुरक्षा केवल राज्य की राजधानी और वीआईपी स्थलों की सुरक्षा तक सीमित नहीं होनी चाहिए, क्योंकि दूरदराज के सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोग हर दिन खतरे में हैं।


कीशिंग ने आरोप लगाया कि नामली पुलिस स्टेशन में गंभीर जनशक्ति की कमी है।


उन्होंने कहा, "हमले के दिन वहां एक भी राज्य पुलिसकर्मी मौजूद नहीं था।"


कीशिंग के अनुसार, चोरो गांव लगभग पूरी तरह से जलकर खाक हो गया, जबकि नामली और वांगली गांवों में कई घर या तो पूरी तरह से जल गए या आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गए।


हमले के दौरान की घटनाएँ

उन्होंने यह भी दावा किया कि चोरो गांव के एक पादरी और चार महिलाओं को हमले के दौरान कथित तौर पर अगवा किया गया था, लेकिन बाद में उन्हें कुछ दूरी पर छोड़ दिया गया। उनके मोबाइल फोन, नकद और अन्य सामान भी ले लिए गए।


विधायक ने नजदीकी सुरक्षा बलों की प्रतिक्रिया पर भी सवाल उठाया, यह आरोप लगाते हुए कि आसाम राइफल्स के कैम्प में तैनात बलों ने हमले के दौरान लंबे समय तक चली गोलीबारी की रिपोर्ट के बावजूद कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।


सुरक्षा एजेंसियाँ स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रही हैं, जबकि आगे की जानकारी का इंतजार किया जा रहा है।