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भोपाल में ट्विशा शर्मा की मौत की जांच में CBI की सक्रियता

भोपाल में ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में CBI ने जांच को तेज कर दिया है, जिसमें मृतका के पति और सास के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। स्थानीय पुलिस की लापरवाही और सबूतों की कमी ने मामले को और जटिल बना दिया है। 12 मई को मृतका का शव फंदे से लटका मिला था, जिसके बाद परिवार ने दहेज उत्पीड़न का आरोप लगाया। सर्वोच्च अदालत ने भी मामले का संज्ञान लिया है और निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है। जानें इस मामले में आगे क्या हो रहा है।
 

ट्विशा शर्मा मौत मामले में CBI की कार्रवाई

Bhopal Twisha Death Mystery: भोपाल में ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने जांच की प्रक्रिया को तेज कर दिया है। CBI ने मृतका के पति समर्थ सिंह और उनकी सास, पूर्व जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है। दिल्ली से आई CBI की विशेष अपराध इकाई ने मामले से संबंधित दस्तावेज और सबूत इकट्ठा करना शुरू कर दिया है। इस बीच, भोपाल पुलिस की लापरवाही और कार्यप्रणाली एक बार फिर से सवालों के घेरे में आ गई है.


पुलिस की लापरवाही और सबूतों की कमी

ट्विशा शर्मा केस में फिर बड़ी चूक… AIIMS टीम को भोपाल पुलिस ने नहीं दी वो बेल्ट, जिससे मॉडल ने लगाया था फंदा

सूत्रों के अनुसार, दिल्ली एम्स की टीम को दोबारा पोस्टमार्टम के लिए भोपाल आने पर स्थानीय पुलिस ने वह बेल्ट नहीं दिखाई, जिसका उपयोग आत्महत्या के लिए किया गया था। पुलिस ने कहा कि यह बेल्ट फॉरेंसिक साइंस लैबोरेट्री (FSL) के पास है, जिसके बाद अब पुलिस FSL को पत्र लिखने की तैयारी कर रही है.


घटनास्थल की जांच में देरी

घटना के 13 दिन बाद, सोमवार को पुलिस ने घटना स्थल का स्पॉट वेरिफिकेशन किया। लगभग दो घंटे तक मृतका के ससुराल में रुकने वाली टीम ने जांच के लिए मोबाइल, लैपटॉप और अन्य डिजिटल सबूतों को अपने कब्जे में लिया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में स्थानीय पुलिस की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि संवेदनशील मामले में सबूतों को सुरक्षित रखने और समय पर जांच करने में भारी लापरवाही बरती गई है.


मामले की सुनवाई और अदालत का संज्ञान

क्या हुआ अब तक केस में?

ट्विशा शर्मा (33) का शव 12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स में उनके ससुराल में फंदे से लटका मिला था। मायके पक्ष ने ससुराल वालों पर गंभीर दहेज उत्पीड़न और हत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया है, जबकि ससुराल पक्ष इसे ड्रग्स की लत से जुड़ी आत्महत्या बता रहा है। इस बीच, देश की सर्वोच्च अदालत ने भी मामले का गंभीरता से संज्ञान लिया है। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सुनवाई के दौरान आश्वासन दिया है कि जांच निष्पक्ष और स्वतंत्र होगी। साथ ही, कोर्ट ने दोनों पक्षों को मीडिया में बयानबाजी से बचने की सख्त सलाह दी है.