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भारतीय सेना के कर्नल की गिरफ्तारी: रिश्वतखोरी का मामला उजागर

केंद्रीय जांच ब्यूरो ने भारतीय सेना के कर्नल हिमांशु बाली को रिश्वतखोरी के आरोप में गिरफ्तार किया है। उन पर कानपुर के एक रक्षा आपूर्तिकर्ता से रिश्वत लेकर टेंडरों में हेरफेर करने का आरोप है। जांच में यह भी सामने आया है कि कर्नल ने घटिया सैंपल को मंजूरी दी और कई अन्य लोगों के साथ मिलकर भ्रष्टाचार किया। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और क्या है आगे की कार्रवाई।
 

कर्नल की गिरफ्तारी और आरोप

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने मंगलवार को भारतीय सेना के एक कर्नल को गिरफ्तार किया है। इस अधिकारी पर आरोप है कि उसने कानपुर के एक रक्षा आपूर्तिकर्ता से रिश्वत लेकर टेंडरों में हेरफेर किया और घटिया सैंपल को मंजूरी दी। गिरफ्तार किए गए अधिकारी की पहचान हिमांशु बाली के रूप में हुई है, जो आर्मी ऑर्डनेंस कोर की ईस्टर्न कमांड में तैनात हैं.


जांच का विवरण

यह ईस्टर्न कमांड पूर्वी क्षेत्र में हथियारों और गोला-बारूद की आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जांच एजेंसी के सूत्रों के अनुसार, कर्नल बाली को कोलकाता में गिरफ्तार किया गया और अब उसे दिल्ली लाया जा रहा है। CBI ने सेना के टेंडरों में कथित भ्रष्टाचार के मामले में एक एफआईआर भी दर्ज की है, जिसमें कर्नल बाली सहित कई अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया है.


कर्नल बाली के संबंध

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज एफआईआर में कहा गया है कि कर्नल हिमांशु बाली का कानपुर की कंपनी 'ईस्टर्न ग्लोबल लिमिटेड' और उसके मालिकों अक्षत और मयंक अग्रवाल के साथ गहरा संबंध था। यह कंपनी देशभर में कई रक्षा संस्थानों को आपूर्ति कर रही है और आरोप है कि अग्रवाल पिता-पुत्र ने अनुचित लाभ के लिए कर्नल बाली के साथ नियमित संपर्क रखा.


रिश्वत लेने का आरोप

एफआईआर में यह भी कहा गया है कि ईस्टर्न ग्लोबल लिमिटेड के संचालकों पर सेना के टेंडर प्राप्त करने के लिए रिश्वत देने का आरोप है। जांच एजेंसी का कहना है कि कंपनी को कई टेंडरों में अनुचित लाभ पहुंचाया गया। कर्नल बाली पर आरोप है कि उन्होंने टेंडर दिलाने, घटिया सैंपल पास कराने और बढ़े हुए बिलों को मंजूरी देने के लिए भारी मात्रा में रिश्वत ली.


रिश्वत की रकम का प्रबंधन

जांच में यह भी सामने आया कि कर्नल बाली ने 16 मई को अक्षत अग्रवाल से संपर्क किया और उन्हें बकाया रिश्वत की रकम की याद दिलाई। उन्होंने निर्देश दिया कि यह रकम दिल्ली-NCR क्षेत्र में पहुंचाई जाए। हालांकि, अक्षत ने बड़ी रकम देने में असमर्थता जताई. इसके बाद, कर्नल बाली ने अक्षत के ड्राइवर से संपर्क किया और उसे निर्देश दिया कि वह बिना किसी चूक के रिश्वत की रकम नरेश पाल तक पहुंचा दे.


हवाला के जरिए रकम का प्रबंधन

हवाला के माध्यम से लगभग 50 लाख रुपये दिल्ली-NCR पहुंचाने की योजना बनाई जा रही थी। जांच एजेंसी ने यह भी दर्ज किया कि अक्षत दिल्ली के चांदनी चौक में एक बिचौलिए के जरिए कर्नल को देने के लिए 50 लाख रुपये का इंतजाम करते हुए पाए गए। इस मामले में अक्षत अग्रवाल, मयंक अग्रवाल, आशुतोष शुक्ला, नरेश पाल और अन्य अज्ञात व्यक्तियों को भी आरोपी बनाया गया है.