भारतीय सेना की वित्तीय शक्तियों में वृद्धि से ऑपरेशनल क्षमता में सुधार
सेना की ऑपरेशनल क्षमता को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय शक्तियों में बदलाव
भारतीय सेना की कार्यक्षमता को और अधिक सशक्त बनाने के लिए रक्षा मंत्रालय ने फील्ड कमांडरों की वित्तीय शक्तियों में महत्वपूर्ण परिवर्तन किए हैं। मंत्रालय ने विभिन्न स्तरों पर वित्तीय अधिकारों को दोगुना या उससे अधिक बढ़ा दिया है, जिससे आवश्यकतानुसार उपकरणों और सेवाओं की खरीद में तेजी लाई जा सकेगी। सरकार का मानना है कि इस कदम से सेना की तैयारियों में सुधार होगा, खरीद प्रक्रिया में तेजी आएगी और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा.
रक्षा मंत्रालय ने फील्ड कमांडरों की वित्तीय शक्तियों में 100 प्रतिशत तक की वृद्धि की है। कुछ मामलों में यह वृद्धि दोगुने से भी अधिक है। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, बढ़े हुए वित्तीय अधिकारों से फील्ड स्तर पर निर्णय लेने की क्षमता में सुधार होगा और सेना की ऑपरेशनल तैयारियों में वृद्धि होगी। इन परिवर्तनों के माध्यम से इस वित्तीय वर्ष में लगभग 1.25 लाख करोड़ रुपये की खरीद प्रक्रिया को गति मिलने की संभावना है, जिसमें रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) और आयात पर निर्भरता कम करने से संबंधित परियोजनाएं शामिल हैं.
आर्मी कमांडरों और सर्विस चीफ को मिले नए अधिकार
नए नियमों के अनुसार, आर्मी कमांडरों और उनके समकक्ष अधिकारियों की खरीद सीमा को 30 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 100 करोड़ रुपये कर दिया गया है। वहीं, सर्विस चीफ स्तर के अधिकारियों के लिए यह सीमा 75 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 125 करोड़ रुपये कर दी गई है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इन परिवर्तनों को मंजूरी दी है। यह वित्तीय शक्तियों में लगभग पांच साल बाद किया गया बड़ा संशोधन है। मंत्रालय का मानना है कि सेना के विस्तार और बढ़ती परिचालन आवश्यकताओं को देखते हुए यह कदम आवश्यक था.
स्वदेशीकरण और संयुक्त खरीद को मिलेगा बढ़ावा
रक्षा मंत्रालय ने स्वदेशी रक्षा उत्पादन और रिसर्च एंड डेवलपमेंट को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय शक्तियों में वृद्धि की है। इसका उद्देश्य रक्षा क्षेत्र में आयात पर निर्भरता को कम करना और देश में विकसित तकनीकों को प्रोत्साहित करना है। नए प्रावधानों में तीनों सेनाओं के बीच संयुक्त खरीद को भी प्रोत्साहित किया गया है। इसके लिए लीड सर्विस को सामान्य खरीद की तुलना में अधिक वित्तीय अधिकार दिए गए हैं, जिससे संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और खरीद प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनेगी.
यह निर्णय रक्षा मंत्री द्वारा शुरू किए गए व्यापक रक्षा सुधारों का हिस्सा माना जा रहा है। सरकार का लक्ष्य खरीद प्रक्रिया को सरल बनाना और सेनाओं को नई तकनीकों को तेजी से अपनाने में सक्षम बनाना है। माना जा रहा है कि इन परिवर्तनों से भविष्य में ड्रोन, एंटी-ड्रोन सिस्टम और अन्य आधुनिक रक्षा उपकरणों की खरीद में भी तेजी आएगी.