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भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की बड़ी बिकवाली, एक दिन में निकाले 20,637 करोड़ रुपये

शुक्रवार को विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में एक दिन में 20,637 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड बिकवाली की। यह घटना MSCI इंडेक्स में हाल ही में हुए परिवर्तनों के प्रभाव से जुड़ी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह गतिविधि उच्च-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग और पैसिव फंड के प्रवाह से प्रभावित हुई है। जानें इस बिकवाली के पीछे के कारण और बाजार के जानकारों की राय।
 

शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की गतिविधियाँ

शुक्रवार को विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने भारतीय शेयर बाजार में एक महत्वपूर्ण बिकवाली की, जिसमें उन्होंने एक ही दिन में 20,637 करोड़ रुपये निकाल लिए। यह हाल के वर्षों में एक दिन में की गई सबसे बड़ी बिकवाली में से एक मानी जा रही है। यह घटना तब हुई जब बाजार MSCI इंडेक्स में हाल ही में हुए परिवर्तनों के प्रभाव से प्रभावित था। ACE Equity के आंकड़ों के अनुसार, इससे पहले की सबसे बड़ी गिरावट पिछले महीने (2 अप्रैल, 2026) को हुई थी, जब FIIs ने एक दिन में 19,837 करोड़ रुपये निकाले थे.


बाजार में गिरावट का कारण

इस बिकवाली के दौरान बेंचमार्क इंडेक्स में 1.5 प्रतिशत की गिरावट आई। बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि इस कमजोरी का मुख्य कारण इंडेक्स में बदलाव से संबंधित पैसिव फंड का प्रवाह था। विदेशी निवेशकों की गतिविधियों का पैमाना न केवल निकाले गए पैसे की बड़ी राशि के कारण, बल्कि सत्र के दौरान हुए भारी कारोबार के कारण भी महत्वपूर्ण रहा। NSE के कुल 287,452 करोड़ रुपये के कारोबार में FPIs का हिस्सा 198,465 करोड़ रुपये था, जो उस दिन के कुल कारोबार का लगभग 69 प्रतिशत था.


व्यापार में वृद्धि

हालांकि FPIs ने दिन के अंत में 20,637 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की, लेकिन सत्र के दौरान उन्होंने इस राशि से लगभग 9.6 गुना अधिक का कारोबार किया। इसके विपरीत, घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs) 16,260 करोड़ रुपये के शुद्ध खरीदार रहे और उन्होंने कुल 53,772 करोड़ रुपये का कारोबार किया। इस भारी भागीदारी ने यह सवाल उठाया कि क्या यह गतिविधि पूरी तरह से MSCI से जुड़े पोर्टफोलियो में बदलाव के कारण थी, या फिर उच्च-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग (HFT) की रणनीतियों ने कारोबार की मात्रा को बढ़ा दिया था.


विशेषज्ञों की राय

कोटक महिंद्रा एसेट मैनेजमेंट के MD निलेश शाह ने इस गतिविधि की तीव्रता पर सवाल उठाया, यह देखते हुए कि भारतीय शेयर बाजार इस समय FPIs के लिए प्राथमिक निवेश केंद्र नहीं है। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या शुक्रवार को हुई भारी गतिविधि पूरी तरह से MSCI में बदलाव के कारण थी, या फिर HFT गतिविधियों ने कारोबार के वॉल्यूम को बढ़ा दिया था. मार्केट विशेषज्ञ गुरमीत चड्ढा ने भी ट्रेडिंग वॉल्यूम में अचानक आई वृद्धि पर सवाल उठाते हुए कहा कि 'स्पीड और पैसे की ताकत' का उपयोग करके बाजार की चाल को प्रभावित किया जा रहा है.


MSCI में बदलाव

MSCI की हालिया समीक्षा में फेडरल बैंक, MCX, NALCO और इंडियन बैंक को MSCI स्टैंडर्ड इंडेक्स में शामिल किया गया, जबकि Hyundai Motor India, Jubilant FoodWorks, Kalyan Jewellers और RVNL को हटा दिया गया। ये बदलाव 29 मई को ट्रेडिंग बंद होने के बाद लागू होंगे। इस समीक्षा के परिणामस्वरूप Adani Power, BPCL, Nykaa, Trent और OFFS का वेटेज भी बढ़ गया। MSCI स्टैंडर्ड इंडेक्स में भारत का कुल वेटेज लगभग 12.3 प्रतिशत पर स्थिर रहा।