भारतीय वायुसेना के नए प्रमुख का विजन: सुरक्षा और आत्मनिर्भरता पर जोर
भारतीय वायुसेना के नए प्रमुख का दृष्टिकोण
नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना के नए प्रमुख एयर चीफ मार्शल अशुतोष दीक्षित ने अपने कार्यभार ग्रहण करने के बाद वायुसेना की तैयारियों और भविष्य की रणनीति को साझा किया। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा के लिए वायुसेना के सभी स्क्वाड्रन, रडार, एयर डिफेंस यूनिट और वायु योद्धाओं को हमेशा सतर्क रहना चाहिए। उन्हें किसी भी आपात स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने यह भी बताया कि बदलते सुरक्षा परिदृश्य और युद्ध की तकनीकों में हो रहे परिवर्तनों को देखते हुए वायुसेना को अपनी क्षमताओं का निरंतर विस्तार करना आवश्यक है।
एयर चीफ मार्शल दीक्षित ने 31 अक्टूबर को भारतीय वायुसेना के 29वें प्रमुख के रूप में पदभार ग्रहण किया। इसके अगले दिन उन्होंने अपने दृष्टिकोण और प्राथमिकताओं को साझा करते हुए 'वायु' (VAYU) नामक चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित रणनीति प्रस्तुत की। इसमें सतर्कता और परिचालन तत्परता, आत्मनिर्भरता, रणनीतिक कौशल और नवाचार, तथा तीनों सेनाओं के बीच एकजुट प्रयास शामिल हैं। उनके अनुसार, इन चार प्राथमिकताओं के आधार पर भारतीय वायुसेना को भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों के लिए तैयार किया जाएगा।
युद्ध के बदलते स्वरूप के बीच वायुसेना की तत्परता सबसे अहम
वायुसेना प्रमुख ने कहा कि भारत का सुरक्षा वातावरण लगातार चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। आधुनिक तकनीक और नए हथियारों ने युद्ध की प्रकृति को काफी बदल दिया है। अब युद्ध केवल पारंपरिक सैन्य संसाधनों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि ड्रोन, लंबी दूरी तक मार करने वाले सटीक हथियार, अंतरिक्ष तकनीक, साइबर क्षमता, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम जैसे नए क्षेत्र भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आने वाले दशक में भारत को जिस तरह की वायुसेना की आवश्यकता होगी, उसके अनुरूप मौजूदा क्षमताओं को विकसित करना जरूरी है। इसके बावजूद किसी भी परिस्थिति में युद्ध के लिए तैयार रहने और जीत हासिल करने की क्षमता से समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने परिचालन तत्परता को अपनी रणनीति का पहला और सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
दीक्षित के अनुसार, भारतीय वायुसेना की स्वीकृत लड़ाकू स्क्वाड्रन संख्या को दोबारा हासिल करना भी उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक होगा। इसके लिए लड़ाकू विमानों की उपलब्धता बढ़ाने, आधुनिक तकनीक अपनाने और सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
स्वदेशी लड़ाकू विमान और हथियार होंगे वायुसेना की पहली पसंद
वायुसेना प्रमुख ने अपनी रणनीति के दूसरे स्तंभ 'आत्मनिर्भरता' पर जोर देते हुए कहा कि भारतीय सेंसर, स्वदेशी प्लेटफॉर्म और देश में विकसित हथियार प्रणालियां वायुसेना की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में रहेंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत को अपनी सैन्य जरूरतों के लिए स्वदेशी तकनीक और रक्षा उत्पादन पर अधिक निर्भर होना होगा।
उन्होंने कहा कि वायुसेना केवल युद्ध लड़ने और जीतने के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी मजबूत हवाई ताकत के माध्यम से संभावित संघर्षों को रोकने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसके लिए स्वदेशी रक्षा प्रणालियों का पर्याप्त संख्या में उपलब्ध होना जरूरी है, ताकि लंबे समय तक चलने वाले सैन्य अभियानों की जरूरतों को पूरा किया जा सके।
इस दिशा में तेजस एमके-1ए, तेजस एमके-2 और पांचवीं पीढ़ी के एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) कार्यक्रम को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके साथ ही भारतीय हथियारों और सेंसर प्रणालियों के विकास तथा उनकी उपलब्धता बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
तकनीकी नवाचार और AI आधारित प्रणालियों पर रहेगा जोर
दीक्षित ने अपनी रणनीति के तीसरे स्तंभ 'युक्ति' को भारतीय वायुसेना की तकनीकी और रणनीतिक क्षमता से जोड़ा। उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध में सफलता हासिल करने के लिए सैन्य सिद्धांतों, प्रक्रियाओं और तकनीक में लगातार नवाचार करना आवश्यक है।
उन्होंने नेटवर्क आधारित और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से संचालित कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम विकसित करने पर जोर दिया। इसके अलावा ड्रोन से होने वाले हमलों का मुकाबला करने के लिए बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था तैयार करना, विमानों और अन्य सैन्य संसाधनों का समय पर रखरखाव, सैन्य ठिकानों की सुरक्षा तथा परिचालन क्षमता को मजबूत करना भी प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।
वायुसेना प्रमुख ने अंतरिक्ष के निकटवर्ती क्षेत्र यानी नियर-स्पेस को भी भविष्य में वायुसेना के लिए एक महत्वपूर्ण परिचालन क्षेत्र बताया। उनके अनुसार, आधुनिक तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए इन सभी क्षेत्रों में लगातार सुधार और विकास की जरूरत है।
तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल पर विशेष ध्यान
वायुसेना प्रमुख की रणनीति का चौथा स्तंभ 'एकजुट प्रयास' है। इसके तहत भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने पर जोर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए तीनों सेनाओं को एक साझा रणनीति के तहत काम करना होगा।
उन्होंने 'JAI' यानी जॉइंटनेस, आत्मनिर्भरता और नवाचार के व्यापक विजन का उल्लेख करते हुए कहा कि सेना, नौसेना, वायुसेना और राष्ट्रीय एजेंसियों को मिलकर योजना बनानी होगी और जरूरत पड़ने पर एक साथ कार्रवाई करनी होगी। उन्होंने कहा कि हवाई ताकत का अधिकतम प्रभाव तभी सामने आता है, जब उसे किसी सैन्य अभियान की शुरुआत से ही समग्र रणनीति का हिस्सा बनाया जाए।
पूर्व वायुसेना प्रमुख एपी सिंह के योगदान को सराहा
एयर चीफ मार्शल अशुतोष दीक्षित ने अपने पूर्ववर्ती एयर चीफ मार्शल एपी सिंह के कार्यकाल का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि एपी सिंह के नेतृत्व में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना ने दिखाया कि सटीक और निर्णायक हवाई शक्ति किस तरह महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
उन्होंने पूर्व वायुसेना प्रमुख का आभार जताते हुए कहा कि उन्हें एक ऐसी वायुसेना की जिम्मेदारी मिली है, जो उच्च स्तर की परिचालन तत्परता के साथ काम कर रही है। दीक्षित ने भरोसा दिलाया कि इस क्षमता को आगे और मजबूत किया जाएगा।
वायु योद्धाओं और उनके परिवारों का कल्याण भी प्राथमिकता
वायुसेना प्रमुख ने कहा कि सैन्य तैयारियों और आधुनिकीकरण के साथ वायुसेना के जवानों तथा उनके परिवारों का कल्याण भी उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा। एयर वॉरियर्स, अग्निवीरवायु कर्मियों, नागरिक कर्मचारियों, पूर्व सैनिकों, वीर नारियों और उनके परिवारों के प्रशिक्षण, पेशेवर विकास, सुरक्षा, मनोबल और सम्मान पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि इन सभी कर्मियों की कार्यक्षमता और उनका मनोबल वायुसेना की मजबूती का महत्वपूर्ण आधार है। इसलिए उनके कल्याण और सुरक्षा से जुड़े विषयों पर व्यक्तिगत रूप से ध्यान दिया जाएगा।
अंत में उन्होंने देशवासियों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि भारतीय वायुसेना पूरी तरह सतर्क, तैयार और दृढ़ संकल्पित है। वायुसेना का संकल्प देश की जरूरत के अनुसार अपनी क्षमताओं को लगातार विकसित करना और जब भी राष्ट्र को आवश्यकता हो, तत्काल अपनी जिम्मेदारी निभाना है।
दीक्षित का 'वायु' विजन ऐसे समय में सामने आया है, जब भारत की सुरक्षा चुनौतियां लगातार बदल रही हैं और आधुनिक सैन्य तकनीक का महत्व तेजी से बढ़ रहा है। उनकी प्राथमिकताओं से स्पष्ट है कि आने वाले समय में भारतीय वायुसेना का जोर युद्धक क्षमता बढ़ाने, स्वदेशी रक्षा तकनीक को मजबूत करने, आधुनिक प्रणालियां अपनाने और तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर रहेगा।