भारतीय वायु सेना के कर्मचारी पर जासूसी का आरोप: पाकिस्तान को बेचीं गोपनीय जानकारियाँ
गद्दार का पर्दाफाश
एक व्यक्ति, जिस पर भारत ने भरोसा किया, अब देश के खिलाफ गद्दारी का आरोप झेल रहा है। सुमित कुमार, जो उत्तर प्रदेश के प्रयागराज का निवासी है, असम के चाबुआ एयरफोर्स स्टेशन पर मल्टीटास्किंग स्टाफ के रूप में कार्यरत था। हालांकि, उसकी असलियत कुछ और ही थी। पिछले दो वर्षों में, उसने पाकिस्तान को भारत की मिसाइलों से जुड़ी संवेदनशील जानकारियाँ बेचीं।
जांच एजेंसियों के अनुसार, सुमित ने 2023 में पाकिस्तानी हैंडलर्स से संपर्क किया और पैसों के लालच में आकर देश की सुरक्षा से जुड़ी जानकारी लीक करना शुरू कर दिया। यह जानकारी केवल वायु सेना के भीतर रहनी चाहिए थी, लेकिन उसने इसे दुश्मन देश तक पहुंचा दिया। इस मामले का खुलासा एक अन्य गिरफ्तारी के बाद हुआ, जब जैसलमेर में एक संदिग्ध को पकड़ा गया।
गुप्त जानकारी का खुलासा
जांच में यह सामने आया कि सुमित ने एयरफोर्स स्टेशन की लोकेशन, फाइटर एयरक्राफ्ट की तैनाती, और मिसाइल सिस्टम से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ साझा कीं। अगर यह जानकारी गलत हाथों में चली जाती, तो देश को बड़ा नुकसान हो सकता था। सुमित ने पाकिस्तानी एजेंट्स के लिए सोशल मीडिया अकाउंट्स बनाए थे, जिससे वह गुप्त बातचीत कर रहा था।
एजेंसियों ने उसे हिरासत में लिया और जयपुर में गहन पूछताछ के लिए ले जाया गया। उसे आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम 1923 और अन्य धाराओं के तहत गिरफ्तार किया गया। अगर सुमित पकड़ा नहीं जाता, तो एयरफोर्स ऑपरेशन को खतरा हो सकता था।
जांच की प्रगति
30 जनवरी को जैसलमेर में झबराराम की गिरफ्तारी के बाद सुमित कुमार की जांच तेज हुई। झबराराम ने जांचकर्ताओं को सुमित तक पहुँचाया। अधिकारियों ने बताया कि सुमित ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए वायु सेना के संवेदनशील डेटा तक पहुँच बनाई। पाकिस्तानी हैंडलर फर्जी सोशल मीडिया खातों के माध्यम से उससे संपर्क में थे।
चाबुआ एयरफोर्स स्टेशन, जो चीन और म्यांमार की सीमाओं के निकट स्थित है, एक महत्वपूर्ण रक्षा प्रतिष्ठान है। सुमित ने 2023 से पाकिस्तानी खुफिया एजेंटों के साथ संपर्क बनाए रखा और गोपनीय जानकारी साझा की। उसे पूछताछ के लिए जयपुर लाया गया, जहाँ कई एजेंसियों ने उससे पूछताछ की।