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भारतीय रेलवे का नया वंदे भारत 3.0: स्वदेशी एल्युमिनियम से बनेगी नई ट्रेनें

भारतीय रेलवे ने वंदे भारत 3.0 परियोजना के तहत नई ट्रेनें बनाने के लिए 100% स्वदेशी एल्युमिनियम तकनीक को अपनाने का निर्णय लिया है। इस कदम से न केवल निर्माण लागत में कमी आएगी, बल्कि ट्रेन का वजन भी 30 से 40 प्रतिशत तक घटेगा। नई ट्रेनें तटीय क्षेत्रों में जंग से सुरक्षित रहेंगी और सुरक्षा मानकों में भी सुधार होगा। रेलवे का लक्ष्य अगस्त 2027 तक इस तकनीक का परीक्षण पूरा करना और 400 नई वंदे भारत ट्रेनों को ट्रैक पर उतारना है।
 

भारतीय रेलवे का क्रांतिकारी कदम

भारतीय रेलवे भविष्य के सफर को और अधिक आधुनिक और तेज बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण मिशन पर कार्यरत है, जो इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। वंदे भारत 3.0 परियोजना के अंतर्गत, रेल मंत्रालय ने सभी वंदे भारत स्लीपर और उच्च गति वाले वर्जन के लिए 100% स्वदेशी एल्युमिनियम बॉडी का निर्माण करने की स्वीकृति दी है।


भारत की निर्भरता खत्म

इस नई पहल के माध्यम से, ट्रेनों के निर्माण में यूरोप या अन्य विकसित देशों पर निर्भरता समाप्त हो जाएगी। आइए जानते हैं कि यह स्वदेशी तकनीक रेलवे की गति को कैसे प्रभावित करेगी।


वजन में कमी

वर्तमान में, सभी वंदे भारत ट्रेनें स्टेनलेस स्टील से निर्मित हैं। तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि स्वदेशी एल्युमिनियम का उपयोग करने से ट्रेन का कुल वजन 30 से 40 प्रतिशत तक कम हो जाएगा। इसका सीधा प्रभाव ट्रेन की गति और पिकअप पर पड़ेगा। नई वंदे भारत ट्रेनें कुछ ही सेकंड में 160 से 180 किलोमीटर प्रति घंटे की गति प्राप्त कर सकेंगी।


निर्माण लागत में कमी

एक वरिष्ठ रेलवे अधिकारी ने बताया कि पहले विदेशी विक्रेताओं से विशेष ग्रेड एल्युमिनियम का आयात करना पड़ता था, जिससे लागत बढ़ जाती थी। अब, स्थानीय स्तर पर वेल्डिंग, डिजाइनिंग और असेंबलिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे निर्माण लागत में 10 से 15 प्रतिशत की कमी आने की उम्मीद है।


तटीय क्षेत्रों के लिए फायदेमंद

मुंबई, चेन्नई, कोलकाता और ओडिशा जैसे तटीय क्षेत्रों में चलने वाली ट्रेनों के लिए यह तकनीक वरदान साबित होगी। समुद्री नम हवाओं के कारण स्टील की ट्रेनों में जंग लगने का खतरा रहता है, जबकि एल्युमिनियम जंग नहीं लगने के कारण ये ट्रेनें 35 से 40 वर्षों तक सुरक्षित रहेंगी।


सुरक्षा मानकों में सुधार

रेलवे ने सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी है। वंदे भारत 3.0 की नई ट्रेनों में अत्याधुनिक सुरक्षा कवच कवच 4.0 शामिल होगा, जो कोहरे या मानवीय चूक की स्थिति में ऑटोमैटिक ब्रेक लगाने की क्षमता रखता है।


भविष्य की योजनाएँ

रेलवे ने इस मेगा प्रोजेक्ट के लिए एक टाइमलाइन निर्धारित की है। अगस्त 2027 तक स्वदेशी बुलेट ट्रेन के लिए इस एल्युमिनियम तकनीक का परीक्षण पूरा करने का लक्ष्य है। अगले 5 वर्षों में, रेलवे का इरादा कम से कम 400 वंदे भारत ट्रेनों को इसी हल्की एल्युमिनियम बॉडी के साथ ट्रैक पर उतारने का है।