भारतीय रेल पर भोजन की गुणवत्ता को लेकर 5.13 करोड़ रुपये का जुर्माना
रेल मंत्री ने दी जानकारी
नई दिल्ली, तीन अगस्त: ट्रेनों में भोजन की गुणवत्ता और अस्वच्छ पेंट्री कारों से संबंधित शिकायतों की जांच के बाद, पिछले तीन वर्षों में सेवा प्रदाताओं पर 5.13 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है। यह जानकारी रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राज्यसभा में साझा की। कांग्रेस सांसद चंद्रकांत हंडोरे ने प्रीमियम ट्रेनों में परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए पूछा कि इस अवधि में कितनी शिकायतें मिलीं।
शिकायतों की संख्या और कार्रवाई
हंडोरे ने यह भी पूछा कि क्या आईआरसीटीसी लाइसेंसधारकों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई की गई है, जो अधिक शुल्क वसूलने और खराब गुणवत्ता का भोजन परोसने के लिए जिम्मेदार हैं। वैष्णव ने अपने लिखित उत्तर में बताया कि भारतीय रेल को हर साल भोजन से संबंधित औसतन केवल 0.0008 प्रतिशत शिकायतें मिलती हैं। इन शिकायतों के आधार पर पिछले तीन वर्षों में 5.13 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
भोजन की गुणवत्ता में सुधार के प्रयास
रेल मंत्री ने कहा कि यात्रियों को उच्च गुणवत्ता और स्वच्छ भोजन प्रदान करने के लिए भारतीय रेल लगातार प्रयासरत है। इसके लिए समय-समय पर आवश्यक कदम उठाए जाते हैं। उन्होंने भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा में सुधार के लिए उठाए गए कई कदमों का उल्लेख किया, जैसे कि आधुनिक बेस किचन की स्थापना और सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से भोजन की तैयारी की निगरानी।
डिजिटल भुगतान के उपाय
वैष्णव ने ट्रेनों में इलेक्ट्रॉनिक बिलिंग और डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के उपायों की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि पेंट्री कारों में पॉइंट ऑफ सेल (पीओएस) मशीनें लगाई जा रही हैं, जिससे डिजिटल बिलिंग और नकद रहित लेनदेन को सरल बनाया जा सके। इसके अलावा, पेंट्री कार में यूपीआई, क्यूआर कोड और स्वाइप मशीन जैसे कई डिजिटल भुगतान विकल्प भी उपलब्ध हैं।
राज्यसभा में जवाब
रेल मंत्री का यह उत्तर सोमवार को राज्यसभा की वेबसाइट पर उपलब्ध कराया गया।