भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले नए निचले स्तर पर पहुंचा
रुपये में गिरावट का कारण
बुधवार को अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 20 पैसे की गिरावट के साथ 94.88 प्रति डॉलर के ऐतिहासिक निचले स्तर पर बंद हुआ। इस गिरावट का मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशी पूंजी की निरंतर निकासी है। विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि भारत के आयात खर्च को प्रभावित कर सकती है।
पश्चिम एशिया में संकट का प्रभाव
पश्चिम एशिया में चल रहे संकट और इसके बढ़ने की संभावनाओं ने निवेशकों के बीच चिंता बढ़ा दी है। विश्लेषकों के अनुसार, निवेशक अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आगामी नीतिगत निर्णय का इंतजार कर रहे हैं। इसके अलावा, इस वर्ष अब तक विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा की गई भारी बिकवाली ने भी बाजार की धारणा को कमजोर किया है। रुपया 94.79 प्रति डॉलर पर खुला और कारोबार के दौरान 94.88 के निचले स्तर तक पहुंच गया।
रुपये में गिरावट का सिलसिला
मंगलवार को भी रुपये में 53 पैसे की गिरावट आई थी, जिससे यह 94.68 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। रुपये का अब तक का सबसे निचला स्तर 27 मार्च को 94.85 प्रति डॉलर था। एलकेपी सिक्योरिटीज के जतिन त्रिवेदी ने कहा कि रुपये में कमजोरी का रुख बना हुआ है और जब भी इसमें सुधार होता है, बिकवाली का दबाव बना रहता है। आने वाले समय में रुपये में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा, जो कच्चे तेल की कीमतों और पूंजी प्रवाह पर निर्भर करेगा।
डॉलर इंडेक्स में वृद्धि
इस बीच, 6 प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.08 प्रतिशत बढ़कर 98.72 पर पहुंच गया। अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड का भाव वायदा कारोबार में 3.13 प्रतिशत बढ़कर 114.74 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। साथ ही, संयुक्त अरब अमीरात ने मंगलवार को घोषणा की कि वह 1 मई से ओपेक से बाहर हो जाएगा, जो वैश्विक तेल बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण झटका माना जा रहा है।