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भारत सरकार का नया प्रस्ताव: स्मार्टफोनों में Aadhaar ऐप की अनिवार्यता पर विवाद

भारत सरकार ने नए स्मार्टफोनों में Aadhaar ऐप को पहले से इंस्टॉल करने का प्रस्ताव रखा है, जिसे प्रमुख टेक कंपनियों ने सुरक्षा और गोपनीयता के मुद्दों के कारण विरोध किया है। यह विवाद तब उभरा है जब कुछ हफ्ते पहले 'संचार साथी' ऐप को अनिवार्य बनाने के निर्णय पर भी आपत्ति जताई गई थी। UIDAI का तर्क है कि इससे नागरिकों के लिए पहचान सत्यापन आसान होगा। हालांकि, स्मार्टफोन निर्माताओं का कहना है कि इससे लॉजिस्टिक्स में समस्याएँ आ सकती हैं। क्या यह मामला 'संचार साथी' जैसा है? जानें पूरी कहानी में।
 

भारत सरकार और टेक कंपनियों के बीच विवाद

भारत सरकार और प्रमुख तकनीकी कंपनियों के बीच एक नया विवाद उभर रहा है। केंद्र सरकार ने प्रस्तावित किया है कि देश में बेचे जाने वाले सभी नए स्मार्टफोनों में 'Aadhaar' ऐप पहले से इंस्टॉल होना चाहिए। हालांकि, Apple, Samsung और Google जैसी बड़ी कंपनियों ने सुरक्षा और गोपनीयता के मुद्दों का हवाला देते हुए इस प्रस्ताव का विरोध किया है। यह विवाद तब सामने आया है जब कुछ हफ्ते पहले 'संचार साथी' ऐप को अनिवार्य बनाने के सरकार के निर्णय पर भी कंपनियों ने आपत्ति जताई थी। Aadhaar, जो कि सरकार का बायोमेट्रिक पहचान कार्यक्रम है, में 1.34 अरब नागरिक रजिस्टर्ड हैं।


UIDAI का प्रस्ताव: सरकार की योजना क्या है?

रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने आईटी मंत्रालय के माध्यम से स्मार्टफोन निर्माताओं को यह प्रस्ताव दिया है। सरकार का तर्क है कि चूंकि आधार 1.34 अरब नागरिकों की पहचान का मुख्य आधार है, इसलिए ऐप पहले से मौजूद होने पर लोगों को इसे अलग से डाउनलोड करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो 'Aadhaar' ऐप फोन में उसी तरह होगा जैसे कि कैलकुलेटर या घड़ी जैसे डिफॉल्ट ऐप होते हैं।


स्मार्टफोन निर्माताओं का विरोध

Manufacturers' Association for Information Technology (MAIT) ने इस प्रस्ताव का विरोध किया है। विशेष रूप से Apple और Samsung ने सुरक्षा और गोपनीयता से संबंधित चिंताओं को उठाया है, जो पिछले साल 'संचार साथी' ऐप के प्रस्ताव के दौरान भी सामने आए थे। इसके अलावा, MAIT ने कहा कि Aadhaar ऐप को पहले से इंस्टॉल करने के लिए भारत और निर्यात बाजारों के लिए अलग-अलग उत्पादन लाइनों की आवश्यकता होगी, जिससे लॉजिस्टिक्स में समस्याएँ आ सकती हैं। 13 जनवरी को भेजे गए एक आंतरिक ईमेल में, MAIT ने कहा कि यह प्रस्ताव "जनहित में नहीं होगा।"


भारत सरकार Aadhaar ऐप को क्यों अनिवार्य करना चाहती है?

UIDAI ने इस साल जनवरी में नया Aadhaar ऐप लॉन्च किया था, जिससे उपयोगकर्ता अपनी व्यक्तिगत जानकारी को अपडेट कर सकते हैं, परिवार की प्रोफ़ाइल प्रबंधित कर सकते हैं और बायोमेट्रिक डेटा को लॉक कर सकते हैं। सरकार का तर्क है कि ऐप को पहले से इंस्टॉल करने से लोगों के लिए इसे उपयोग करना आसान हो जाएगा, क्योंकि उन्हें इसे अलग से डाउनलोड करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।


क्या यह 'संचार साथी' जैसा मामला है?

आधार ऐप को पहले से इंस्टॉल करने का यह अनुरोध सरकार द्वारा 'संचार साथी' के अनिवार्य आदेश को वापस लेने के कुछ हफ्तों बाद आया है। हालांकि, इसमें कुछ अंतर भी हैं। 'संचार साथी' के मामले में, सरकार ने कंपनियों पर इस ऐप को पहले से इंस्टॉल करने का दबाव डाला था, जबकि आधार ऐप के लिए यह प्रस्ताव एक अनुरोध के रूप में प्रस्तुत किया गया है।


क्या और भी ऐप्स आने वाले हैं?

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि आधार ऐप उन छह सरकारी ऐप्स में से एक है, जिनका स्मार्टफोन निर्माताओं ने भारत सरकार के सामने विरोध किया है। इनमें से एक 'सचेत' (Sachet) है, जो एक आपदा चेतावनी सेवा है। MAIT ने कथित तौर पर 10 मार्च, 2026 को भारतीय IT मंत्रालय के अधिकारी को 'सचेत' ऐप को पहले से इंस्टॉल करने के प्रस्ताव का विरोध किया है। भारत का यह दृष्टिकोण अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ जैसे अन्य लोकतांत्रिक देशों से भिन्न है, जहां सरकारी ऐप्स को पहले से इंस्टॉल करना अनिवार्य नहीं है।