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भारत-म्यांमार संबंधों में नई दिशा: राष्ट्रपति की यात्रा के दौरान सहयोग की पुष्टि

म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग की भारत यात्रा ने द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने म्यांमार की संप्रभुता के प्रति समर्थन व्यक्त किया, जबकि व्यापार और तकनीकी सहयोग पर जोर दिया गया। इस यात्रा में साइबर घोटाले और मानव तस्करी जैसे गंभीर मुद्दों पर भी चर्चा हुई। जानें इस दौरे के दौरान क्या-क्या महत्वपूर्ण बातें हुईं और भारतीय नागरिकों की वापसी के प्रयासों के बारे में।
 

भारत का म्यांमार के प्रति समर्थन

म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग की भारत यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने म्यांमार की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति भारत के समर्थन को फिर से स्पष्ट किया। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने जानकारी दी कि दोनों देशों ने एक-दूसरे के खिलाफ अपनी धरती का उपयोग न करने पर सहमति जताई है। राष्ट्रपति ह्लाइंग ने आश्वासन दिया कि उनकी भूमि का उपयोग भारत की सुरक्षा के खिलाफ नहीं किया जाएगा।


व्यापार और तकनीकी सहयोग पर ध्यान

इस यात्रा के दौरान, म्यांमार के राष्ट्रपति ने भारत-म्यांमार बिजनेस कॉन्क्लेव में भाग लिया। वर्तमान में, दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2 अरब डॉलर से अधिक है, जिसमें भारत का निर्यात 600 मिलियन डॉलर और म्यांमार का निर्यात 1.5 अरब डॉलर से अधिक है। इस दौरे का मुख्य ध्यान तकनीकी, ऊर्जा और बुनियादी ढांचे के सहयोग पर है। उन्होंने ग्रेटर नोएडा में एनटीपीसी एनर्जी टेक्नोलॉजी सेंटर का दौरा किया और अगले दिन मुंबई के लिए रवाना होंगे। राष्ट्रपति ने पीएम मोदी को म्यांमार आने का निमंत्रण भी दिया।


साइबर घोटाले और मानव तस्करी पर चर्चा

विदेश सचिव ने एक सवाल के जवाब में बताया कि बैठक में साइबर स्कैम नेटवर्क और भारतीय नागरिकों की तस्करी के गंभीर मुद्दों पर चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि भारत इस मामले में म्यांमार के साथ लगातार सहयोग कर रहा है।


भारतीय नागरिकों की वापसी के प्रयास

हालिया आंकड़ों के अनुसार, लगभग 150 से अधिक भारतीय नागरिक म्यांमार के साइबर स्कैम कंपाउंड्स में फंसे हुए हैं, जिन्हें वापस लाने के लिए म्यांमार सरकार से बातचीत चल रही है। अब तक 2,411 लोगों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है। विदेश सचिव ने बताया कि इन नागरिकों को अक्सर किसी तीसरे देश के माध्यम से म्यांमार में तस्करी करके लाया जाता है, इसलिए इस समस्या का समाधान करने के लिए द्विपक्षीय और क्षेत्रीय सहयोग की आवश्यकता है।