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भारत-म्यांमार संबंधों को मजबूत करने की दिशा में राष्ट्रपति ह्लाइंग की यात्रा

म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग ने भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आश्वासन दिया कि उनकी भूमि का उपयोग भारत के सुरक्षा हितों के खिलाफ नहीं किया जाएगा। दोनों नेताओं ने व्यापार, रक्षा और ऊर्जा के क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए चर्चा की। इस यात्रा के दौरान, म्यांमार में चल रही शांति प्रक्रिया और सशस्त्र समूहों की गतिविधियों पर भी बात की गई। राष्ट्रपति ह्लाइंग की यात्रा से दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक साझेदारी को और गहरा करने की उम्मीद है।
 

भारत के सुरक्षा हितों की रक्षा का आश्वासन

म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आश्वासन दिया कि उनके देश की भूमि का उपयोग भारत के सुरक्षा हितों के खिलाफ नहीं किया जाएगा। दोनों नेताओं ने व्यापार, रक्षा और ऊर्जा के क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए विस्तृत चर्चा की। आंग ह्लाइंग वर्तमान में पांच दिवसीय यात्रा पर भारत आए हैं, और यह उनकी राष्ट्रपति बनने के बाद की पहली विदेश यात्रा है।


भारत के खिलाफ इस्तेमाल नहीं होगी म्यांमार की जमीन


म्यांमार में हाल ही में हुए संसदीय चुनावों के बाद, जो सत्ताधारी सैन्य जुंटा के खिलाफ प्रदर्शनों के बीच हुए, आंग ह्लाइंग ने भारत की यात्रा की। यह चुनाव दिसंबर और जनवरी में आयोजित किए गए थे, जब सैन्य जुंटा ने एक फरवरी, 2021 को तख्तापलट कर आंग सान सू ची की सरकार को हटा दिया था।


महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर सहयोग

दोनों पक्षों ने कालादान मल्टी-मॉडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट परियोजना और भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग के विकास पर सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति के साथ सू ची के मुद्दे पर चर्चा की, जो म्यांमार में चल रही शांति प्रक्रिया के संदर्भ में थी।


भारत का निरंतर समर्थन

विदेश सचिव ने कहा कि भारत म्यांमार में स्थायी शांति और समावेशिता का समर्थन करता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत का म्यांमार के आंतरिक राजनीतिक मामलों पर टिप्पणी करने का कोई इरादा नहीं है।


मिसरी ने बताया कि प्रधानमंत्री ने म्यांमार में सक्रिय सशस्त्र समूहों की गतिविधियों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि ये समूह भारत की सीमाओं के निकट अपनी गतिविधियां जारी रखे हुए हैं, जिससे भारतीय क्षेत्र में प्रभाव पड़ता है।


सुरक्षा और आर्थिक सहयोग

मिसरी ने कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत में व्यापार, रक्षा, सीमा प्रबंधन और विकास सहायता जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई। दोनों पक्षों ने स्वास्थ्य, शिक्षा, ऊर्जा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की इच्छा व्यक्त की।


प्रधानमंत्री मोदी ने म्यांमार की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति भारत के समर्थन की पुष्टि की और कहा कि म्यांमार की भूमि का उपयोग भारत के सुरक्षा हितों के खिलाफ नहीं होने दिया जाएगा।


राष्ट्रपति ह्लाइंग की मुंबई यात्रा

राष्ट्रपति ह्लाइंग आज मुंबई जाने वाले हैं, जहां राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने उनसे मुलाकात की और द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा की। उनके साथ एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी है, जिसमें कई कैबिनेट मंत्री और उद्योगपति शामिल हैं।