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भारत में सीमेंट ब्रांडों पर नई पुस्तक का लोकार्पण

नोएडा में डॉ. के.एन. झा की नई पुस्तक 'ABC of Cement Brands in India' का भव्य लोकार्पण हुआ। इस पुस्तक में भारतीय सीमेंट उद्योग की विकास यात्रा, ब्रांड निर्माण की प्रक्रिया और भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा की गई है। कार्यक्रम में उद्योग के प्रमुख विशेषज्ञों ने पुस्तक के महत्व पर प्रकाश डाला। जानें इस पुस्तक में क्या खास है और यह किस प्रकार सीमेंट उद्योग से जुड़े पेशेवरों के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ साबित होगी।
 

नोएडा में पुस्तक का भव्य लोकार्पण

नोएडा। भारतीय सीमेंट उद्योग के जाने-माने विशेषज्ञ और लेखक डॉ. के.एन. झा की नई पुस्तक "ABC of Cement Brands in India: Past, Present & Future" का आज एक भव्य समारोह में लोकार्पण किया गया।




इस पुस्तक का लोकार्पण मंजू देवी कनोडिया, विशाल कनोडिया और गौतम कनोडिया (कनोडिया समूह के संस्थापक) द्वारा किया गया। इस अवसर पर भारतीय सीमेंट उद्योग के प्रमुख विशेषज्ञ और पूर्व महानिदेशक, राष्ट्रीय सीमेंट एवं भवन निर्माण सामग्री परिषद (NCB), डॉ. के. मोहन तथा प्रसिद्ध टेक्नो-लीगल सलाहकार और कॉर्पोरेट एडवाइजर विजय सरदाना भी उपस्थित रहे।




कार्यक्रम में बोलते हुए डॉ. के. मोहन ने कहा कि भारत का सीमेंट उद्योग देश की आर्थिक और आधारभूत संरचना के विकास के साथ निरंतर प्रगति कर रहा है, और आज यह विश्व में दूसरे स्थान पर है। तकनीक, गुणवत्ता, स्थिरता और ब्रांड निर्माण में हुए परिवर्तनों ने इस उद्योग की सफलता की कहानी को उजागर किया है। उन्होंने यह भी कहा कि डॉ. झा की पुस्तक सीमेंट उद्योग के विकास को ब्रांड के दृष्टिकोण से समझने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।




विजय सरदाना ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि यह पुस्तक सीमेंट उद्योग से जुड़े पेशेवरों, निवेशकों, नीति-निर्माताओं, शोधकर्ताओं, सलाहकारों और छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ साबित होगी। पुस्तक में यह बताया गया है कि कैसे ब्रांड बनाए जाते हैं, विकसित होते हैं और समय के साथ प्रतिस्पर्धा में पीछे रह जाते हैं।




लेखक डॉ. के.एन. झा ने पुस्तक की विषय-वस्तु पर चर्चा करते हुए बताया कि इसमें 1914 से लेकर वर्तमान तक भारतीय सीमेंट उद्योग की विकास यात्रा का विस्तृत विवरण दिया गया है। पुस्तक में उन 80 से अधिक सीमेंट ब्रांडों का विश्लेषण किया गया है जो समय के साथ बाजार से गायब हो गए। इसके साथ ही उन प्रमुख उद्योगपतियों और प्रमोटरों के योगदान को भी रेखांकित किया गया है जिन्होंने अपने ब्रांडों को चार दशकों से अधिक समय तक सफलतापूर्वक स्थापित रखा।




उन्होंने बताया कि पुस्तक में बहुराष्ट्रीय, सार्वजनिक क्षेत्र और उभरते निजी सीमेंट ब्रांडों की यात्रा और चुनौतियों का भी विस्तार से वर्णन किया गया है। अंतिम अध्याय में भारतीय सीमेंट उद्योग के भविष्य, नवाचार, हरित प्रौद्योगिकी और सतत विकास की संभावनाओं पर विशेष चर्चा की गई है।




इस अवसर पर सीमेंट उद्योग के कई वरिष्ठ पेशेवर और अधिकारी, जिनमें बाबूलाल सिंह, आशुतोष शुक्ला और आर.एन. मालू प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।




लेखक के बारे में


डॉ. के.एन. झा सीमेंट उद्योग के एक प्रतिष्ठित विशेषज्ञ हैं और उन्हें इस क्षेत्र में 34 वर्षों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने ब्रांडिंग, ग्रामीण विपणन और सीमेंट उद्योग से संबंधित कई महत्वपूर्ण पुस्तकों का लेखन किया है।