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भारत में रसोई गैस संकट का समाधान: इलेक्ट्रिक उपकरणों की ओर बढ़ता कदम

ईरान में चल रहे संघर्ष के कारण भारत में रसोई गैस की कमी हो गई है। इस संकट से निपटने के लिए सरकार ने इलेक्ट्रिक उपकरणों के उत्पादन को बढ़ाने की योजना बनाई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर उच्चस्तरीय बैठकें आयोजित की जा रही हैं, ताकि कुकिंग गैस पर निर्भरता को कम किया जा सके। यदि हर घर में इंडक्शन चूल्हा पहुंचता है, तो यह एक बड़ी क्रांति होगी। इसके साथ ही, भारत की बिजली उत्पादन क्षमता भी मजबूत है, जिससे यह योजना सफल हो सकती है।
 

रसोई गैस संकट और सरकार की नई योजना


ईरान में चल रहे संघर्ष के कारण रसोई गैस सिलेंडर की कमी हो गई है, जिससे कई लोग प्रभावित हैं। युद्ध समाप्त होने की संभावना नहीं दिख रही है, इसलिए सरकार ने योजना-B पर कार्य शुरू कर दिया है। इसका उद्देश्य हर रसोई से गैस सिलेंडर को हटाकर बिजली से चलने वाले उपकरणों को स्थापित करना है। इस दिशा में सरकार ने कंपनियों के साथ उच्चस्तरीय बैठकें की हैं और उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।

सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर हाल ही में DPIIT सचिव, बिजली सचिव और विदेश व्यापार महानिदेशक के बीच एक उच्चस्तरीय बैठक हुई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य इंडक्शन हीटर और अन्य इलेक्ट्रिक उपकरणों के उत्पादन को तेजी से बढ़ाना है। सरकार का लक्ष्य है कि कुकिंग गैस पर निर्भरता को न्यूनतम किया जाए, ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर भारतीय रसोइयों पर न पड़े।

पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट ने भारत को अपनी ऊर्जा नीति पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इजराइल-ईरान युद्ध लंबा चलता है, तो सप्लाई चेन बाधित होने से एलपीजी की कमी हो सकती है। सरकारी सूत्रों का कहना है कि हमें भविष्य की चुनौतियों के लिए आज ही तैयार रहना होगा। यदि युद्ध कई वर्षों तक चलता है, तो भी हमारे देश के किचन ठंडे नहीं होने चाहिए।

गैस की कमी के कारण बाजार में इंडक्शन हीटर और इलेक्ट्रिक केतली की मांग तेजी से बढ़ी है। सरकार चाहती है कि इनका उत्पादन इतना बढ़ाया जाए कि लोग इन्हें कम कीमत पर प्राप्त कर सकें। इसके साथ ही, गुणवत्ता में भी सुधार किया जाएगा। सूत्रों ने बताया कि सरकार व्यापारियों को विशेष रियायतें देने पर भी विचार कर रही है।

इंडक्शन के उपयोग से डिमांड में कमी
भारत में करोड़ों घरों में एलपीजी का उपयोग होता है। यदि हर घर में एक इंडक्शन चूल्हा पहुंचता है, तो यह एक बड़ी क्रांति होगी। भारत अपनी जरूरत का लगभग 50-60% LPG आयात करता है। इंडक्शन के बढ़ते उपयोग से इस आयात बिल में अरबों डॉलर की बचत होगी।

एक औसत परिवार महीने में एक सिलेंडर का उपयोग करता है। इंडक्शन पर शिफ्ट होने से खाना पकाने की लागत में 20% से 30% तक की कमी आने का अनुमान है। सरकार का लक्ष्य है कि अगले 2-3 वर्षों में रसोई गैस की मांग को कम से कम 25% तक घटाया जाए। यह भारत के गैस बिल में बड़ी कटौती करेगा।

क्या हमारी बिजली सप्लाई तैयार है?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या हमारे पास इतनी बिजली है? जवाब है- हां! भारत आज बिजली उत्पादन में न केवल आत्मनिर्भर है, बल्कि सरप्लस की स्थिति की ओर बढ़ रहा है। ‘पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ के तहत करोड़ों घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाए जा रहे हैं। इससे इंडक्शन चलाना पूरी तरह मुफ्त हो जाएगा।

बिजली मंत्रालय के अनुसार, हमारा नेशनल ग्रिड अब इतना सक्षम है कि वह शाम के पीक आवर्स में भी इंडक्शन लोड को आसानी से संभाल सकता है। भारत के पास बिजली उत्पादन के लिए पर्याप्त कोयला भंडार है और रिन्यूएबल एनर्जी (सौर और पवन ऊर्जा) में हम दुनिया में अग्रणी हैं।

सिलेंडर का विकल्प तैयार
सरकार की यह रणनीति केवल एक मजबूरी नहीं, बल्कि आगे की सोच है। गैस पाइपलाइन बिछाने में लगने वाले समय और खर्च के मुकाबले बिजली का तार हर घर तक पहले से मौजूद है। यदि सरकार इंडक्शन हीटर के उत्पादन को बढ़ाने और उनकी कीमतों को कम करने में सफल होती है, तो गैस सिलेंडर की समस्या जल्द ही अतीत बन जाएगी। चाहे मध्य पूर्व में युद्ध कितना भी लंबा चले, भारत के पास अपना ‘इलेक्ट्रिक कवच’ तैयार है!