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भारत में रसोई गैस की मांग में अचानक वृद्धि, सरकार ने दी जानकारी

मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष का असर भारत में रसोई गैस की मांग पर पड़ा है, जिससे बुकिंग में अचानक वृद्धि हुई है। सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाए हैं और लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। घरेलू उत्पादन में वृद्धि की गई है और गैस की आपूर्ति बनाए रखने के लिए विशेष समिति का गठन किया गया है। जानें इस मुद्दे पर और क्या जानकारी है और सरकार की क्या योजनाएं हैं।
 

भारत में रसोई गैस की बढ़ती मांग

मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष का प्रभाव अब भारत में भी स्पष्ट रूप से देखने को मिल रहा है। देश में रसोई गैस की मांग में अचानक वृद्धि हुई है, जिससे लोग सामान्य से अधिक सिलेंडर बुक कर रहे हैं। सरकार का कहना है कि यह स्थिति घबराहट के कारण उत्पन्न हुई है और वास्तविक कमी नहीं है।


बढ़ती बुकिंग की जानकारी

पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि युद्ध शुरू होने से पहले भारत में प्रतिदिन लगभग 55 लाख गैस सिलेंडर बुक होते थे। हाल के दिनों में यह संख्या बढ़कर 75 लाख से अधिक हो गई है। उन्होंने कहा कि यह वृद्धि मुख्य रूप से लोगों की घबराहट के कारण हो रही अतिरिक्त बुकिंग को दर्शाती है।


सरकार की अपील

उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और अनावश्यक रूप से सिलेंडर बुक करने से बचें। उनके अनुसार, सरकार रसोई गैस की आपूर्ति को बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।


घरेलू उत्पादन में वृद्धि

सरकार ने घरेलू स्तर पर रसोई गैस के उत्पादन में लगभग 30 प्रतिशत की वृद्धि की है। वर्तमान में, देश में तैयार होने वाली पूरी गैस घरेलू उपभोक्ताओं को उपलब्ध कराई जा रही है ताकि किसी प्रकार की समस्या उत्पन्न न हो।


आयात पर निर्भरता

भारत अपनी रसोई गैस की जरूरत का एक बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। पहले, देश की लगभग 60 प्रतिशत जरूरतें आयात के माध्यम से पूरी होती थीं, जिसमें से लगभग 90 प्रतिशत आपूर्ति फारस की खाड़ी से होकर होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आती थी।


क्षेत्रीय तनाव का प्रभाव

हाल ही में क्षेत्र में बढ़े तनाव के कारण यह समुद्री मार्ग प्रभावित हुआ है। यह संकरा समुद्री मार्ग खाड़ी क्षेत्र को अरब सागर से जोड़ता है और विश्व के तेल तथा गैस परिवहन का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। युद्ध के आरंभ के बाद कई टैंकरों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं भी सामने आई हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है।


सरकार के कदम

इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए, भारत सरकार ने घरेलू उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही, गैस की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था की निगरानी के लिए एक विशेष समिति भी बनाई गई है, जो स्थिति पर नजर रख रही है और जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक आपूर्ति मार्गों पर विचार कर रही है।


कच्चे तेल की स्थिति

सरकार का कहना है कि कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर फिलहाल कोई चिंता की बात नहीं है। अधिकारियों के अनुसार, भारत अब लगभग 40 देशों से कच्चा तेल मंगाता है और देश में आने वाली आपूर्ति दैनिक जरूरत से अधिक है।


ईरान का स्पष्टीकरण

इस बीच, ईरान ने उन खबरों का खंडन किया है, जिसमें कहा गया था कि उसने भारत के झंडे वाले जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि ऐसी खबरों में कोई सच्चाई नहीं है।


विशेषज्ञों की राय

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मध्य पूर्व में तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो इसका प्रभाव वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है। हालांकि, वर्तमान में सरकार का दावा है कि देश में रसोई गैस और ऊर्जा की आपूर्ति को लेकर घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है।