भारत में यूरिया उत्पादन स्थिर, खरीफ सत्र के लिए पर्याप्त भंडार
यूरिया उत्पादन और आयात की स्थिति
पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के बावजूद, भारत में घरेलू यूरिया उत्पादन मार्च और अप्रैल में 37.49 लाख टन रहा, जो पिछले वर्ष के स्तर के लगभग समान है। इसके साथ ही, खरीफ सत्र की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए 37 लाख टन यूरिया का आयात भी सुनिश्चित किया गया है। यह जानकारी सरकार ने बृहस्पतिवार को साझा की।
उर्वरक विभाग की अतिरिक्त सचिव अपर्णा एस. शर्मा ने एक अंतरमंत्रालयी संवाददाता सम्मेलन में बताया कि संकट के बावजूद, उर्वरकों का घरेलू उत्पादन और आयात मजबूत बना हुआ है। इस अवधि में कुल 78 लाख टन उर्वरक की उपलब्धता बढ़ाई गई है।
उन्होंने कहा कि मार्च में 16.49 लाख टन और अप्रैल में 21 लाख टन यूरिया का उत्पादन किया गया, जिससे कुल उत्पादन 37.49 लाख टन हो गया। यह पिछले वर्ष की समान अवधि के लगभग बराबर है।
डायअमोनियम फॉस्फेट का उत्पादन
यूरिया की कमी को आयात के माध्यम से पूरा किया जा रहा है। शर्मा ने बताया कि हमने वैश्विक निविदा जारी कर लगभग 37 लाख टन यूरिया सुनिश्चित किया है। मार्च और अप्रैल में डायअमोनियम फॉस्फेट का घरेलू उत्पादन 4.79 लाख टन, एनपीके 12.69 लाख टन और सिंगल सुपर फॉस्फेट 7.40 लाख टन रहा। फॉस्फेटिक उर्वरकों के लिए 19 लाख टन की वैश्विक निविदा भी जारी की गई है और कच्चे माल की उपलब्धता की नियमित समीक्षा की जा रही है।
उन्होंने कहा कि उर्वरकों की उपलब्धता मजबूत बनी हुई है और आपूर्ति मांग से अधिक है। खरीफ 2026 के लिए 390.45 लाख टन की आवश्यकता के मुकाबले मौजूदा भंडार 193.38 लाख टन है, जो कुल जरूरत का लगभग 50 प्रतिशत है। यूरिया की उपलब्धता 73.81 लाख टन और डीएपी की 23.47 लाख टन है, जबकि अन्य उर्वरक भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं।
यह सब बेहतर योजना, अग्रिम भंडारण और कुशल लॉजिस्टिक का परिणाम है। राज्यों में आपूर्ति की स्थिति मजबूत बनी हुई है। साथ ही, उर्वरकों के अधिकतम खुदरा मूल्य में कोई बदलाव नहीं किया गया है।