भारत में मॉनसून की बारिश में कमी की आशंका, ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
मॉनसून की बारिश में कमी का अनुमान
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने हाल ही में जारी अपने संशोधित अनुमानों में इस वर्ष मॉनसून की बारिश में कमी की संभावना जताई है। नए आंकड़ों के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की कुल बारिश इस साल लंबी अवधि के औसत (LPA) का केवल 90 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। यह आंकड़ा पहले के 92 प्रतिशत के अनुमान से भी कम है। इसके अलावा, देश के कई क्षेत्रों में सामान्य से अधिक दिनों तक भीषण गर्मी का सामना करना पड़ सकता है।
अल नीनो का प्रभाव
IMD ने बताया कि जून में प्रशांत महासागर में कमजोर 'अल नीनो' की स्थिति बनने की संभावना है, जो मॉनसून के दूसरे चरण (जुलाई से सितंबर) में और अधिक प्रभाव डाल सकती है। मौसम विभाग ने कहा, "पूरे देश में मौसमी बारिश का अनुमान 90% है, जिसमें $\pm4\%$ की त्रुटि हो सकती है। इसका मतलब है कि इस साल सामान्य से कम बारिश होने की संभावना अधिक है।"
क्षेत्रवार बारिश का अनुमान
IMD द्वारा जारी स्थानिक वितरण के अनुसार, देश के विभिन्न हिस्सों में मॉनसून का प्रभाव इस प्रकार रहेगा: पूर्वोत्तर भारत में सामान्य या सामान्य से अधिक बारिश की उम्मीद है, जबकि उत्तर-पश्चिम, मध्य और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में बारिश सामान्य से कम रहने का अनुमान है।
भीषण गर्मी का सामना
कमजोर मॉनसून के चलते जून में देश के कई हिस्सों में भीषण गर्मी का सामना करना पड़ सकता है। IMD के अनुसार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, बिहार, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, गुजरात, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में सामान्य से अधिक लू वाले दिन रहने की संभावना है।
भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
कम बारिश का यह नया अनुमान भारत की विकास दर पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। भारत की 51 प्रतिशत कृषि भूमि, जो कुल कृषि उत्पादन का 40 प्रतिशत है, पूरी तरह से मॉनसून की बारिश पर निर्भर है। लगभग 47 प्रतिशत जनसंख्या अपनी आजीविका के लिए कृषि क्षेत्र पर निर्भर है। यदि मॉनसून कमजोर रहता है, तो फसलों का उत्पादन घटने से खाद्य महंगाई बढ़ सकती है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में खपत कम हो जाएगी।
अल नीनो का पूर्व अनुभव
इससे पहले, 2023 में भी 'सामान्य से कम' बारिश देखी गई थी, जो एक 'अल नीनो' वर्ष था। उस समय कुल मौसमी बारिश का LPA 94 प्रतिशत रहा था। इस बार 90 प्रतिशत का अनुमान और भी अधिक चुनौतीपूर्ण स्थिति को दर्शाता है।