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भारत में मानसून की वापसी: बारिश की उम्मीदें बढ़ीं

भारत का दक्षिण-पश्चिम मानसून अब सक्रिय होने की तैयारी में है, जिससे बारिश की उम्मीदें बढ़ गई हैं। मौसम वैज्ञानिकों ने दो महत्वपूर्ण प्रणालियों के सक्रिय होने का संकेत दिया है, जो देश के कई हिस्सों में व्यापक बारिश लाएंगी। उत्तर भारत में भीषण गर्मी से राहत मिलने की संभावना है। जानें कैसे ये मौसम परिवर्तन जुलाई के पहले हफ्ते में बारिश के दौर में बदल सकते हैं।
 

भारत में मानसून की सक्रियता

भारत का दक्षिण-पश्चिम मानसून, जो कुछ हफ्तों की सुस्ती और बारिश की कमी के बाद, अब अपनी पूरी ताकत में लौटने की तैयारी कर रहा है। मौसम विशेषज्ञों ने देश में दो महत्वपूर्ण मौसम प्रणालियों के सक्रिय होने का संकेत दिया है। इस सप्ताह बंगाल की खाड़ी और मध्य भारत में बनने वाले इन प्रणालियों के कारण व्यापक बारिश की संभावना है। इससे उत्तर भारत में भीषण गर्मी और उमस से राहत मिलने की उम्मीद है।


मौसम प्रणालियों का प्रभाव

मौसम वैज्ञानिकों का ध्यान दो प्रमुख मौसम प्रणालियों पर है, जो इस सप्ताह बंगाल की खाड़ी और मध्य भारत में विकसित होने की संभावना है। इससे देश के कई हिस्सों में व्यापक बारिश होने की उम्मीद है, और उत्तर भारत में मानसून की स्थिति भी बेहतर होगी। जून का महीना समाप्त होने को है, लेकिन मानसून अभी तक उत्तर भारत में प्रभावी नहीं हो पाया है। दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा और राजस्थान में लोग भीषण गर्मी का सामना कर रहे हैं, और केवल आंधी-तूफान से थोड़ी राहत मिल रही है।


मानसून ट्रफ़ का महत्व

हालांकि इस क्षेत्र में नमी बढ़ी है, लेकिन मानसून का कोई व्यवस्थित सर्कुलेशन न होने के कारण व्यापक बारिश नहीं हो पाई है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति जल्द ही बदलने वाली है। इसका मुख्य कारण मानसून ट्रफ़ है, जो कम दबाव वाला क्षेत्र है, जिससे भारत में अधिकांश मौसमी बारिश होती है। हालांकि, यह ट्रफ़ अपनी सामान्य स्थिति से काफी उत्तर में, हिमालय की तलहटी के निकट बना हुआ है। इस कारण बारिश वाला सक्रिय क्षेत्र इंडो-गैंगेटिक मैदानों से दूर चला गया है, जिससे दिल्ली और आसपास के राज्यों में मानसून के सही हालात बनने में देरी हुई है।


आने वाले दिनों का पूर्वानुमान

पूर्वानुमान मॉडल संकेत दे रहे हैं कि ट्रफ़ धीरे-धीरे दक्षिण की ओर बढ़ेगा। जैसे-जैसे यह अपनी सामान्य स्थिति के करीब आएगा, वायुमंडलीय अस्थिरता बढ़ने की संभावना है, जिससे पंजाब, हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आंधी-तूफान और व्यापक बारिश होगी। मौसम वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि यह बदलाव 1 जुलाई से 5 जुलाई के बीच शुरू होगा, जब मानसून उत्तर भारत में मजबूती से जम जाएगा और तापमान में उल्लेखनीय गिरावट आएगी।


बंगाल की खाड़ी में गतिविधि

इस हफ्ते बंगाल की खाड़ी में लगातार दो कम दबाव वाले क्षेत्र बनने की संभावना है, जो मध्य भारत से होते हुए जमीन की ओर बढ़ेंगे। ये सिस्टम वातावरण में भारी मात्रा में नमी लाएंगे, जिससे मानसून का सर्कुलेशन मजबूत होगा और पूर्वी, मध्य और पश्चिमी भारत में बारिश बढ़ेगी। पश्चिमी तट पर भी जोरदार बारिश की संभावना है। मुंबई में, जहां पहले ही भारी बारिश हो चुकी है, वहां हफ्ते के मध्य में बारिश फिर से तेज हो सकती है।


बाढ़ और जल-जमाव की चेतावनी

इस नई गतिविधि से उन क्षेत्रों में बारिश बेहतर होने की उम्मीद है जहां अब तक बारिश कम हुई है। हालांकि, विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि जिन इलाकों में लंबे समय तक भारी बारिश होगी, वहां स्थानीय स्तर पर बाढ़, जल-जमाव और परिवहन में रुकावट की आशंका बनी रहेगी। लगभग एक महीने के इंतजार के बाद, भारत का मानसून सिस्टम अब सक्रिय होता दिख रहा है। यदि अनुमान सही साबित होता है, तो जुलाई का पहला हफ्ता छिटपुट प्री-मॉनसून तूफानों से व्यापक और लगातार बारिश की ओर बदलाव का समय हो सकता है।