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भारत में भीषण गर्मी का प्रकोप: तापमान ने तोड़े रिकॉर्ड

भारत इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है, जहां तापमान ने नए रिकॉर्ड तोड़े हैं। देश के कई प्रमुख शहरों में 46 डिग्री तक तापमान पहुंच गया है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में राहत की संभावना कम बताई है। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन और मानवीय गतिविधियों के कारण गर्मी की तीव्रता बढ़ रही है। बांदा जिला इस गर्मी में विशेष रूप से चर्चा में है, जहां तापमान 47.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। जानें इस गर्मी के कारण और इसके प्रभावों के बारे में।
 

गर्मी की लहर का प्रभाव

इस समय पूरा देश भीषण गर्मी की चपेट में है, और उत्तर, मध्य तथा पूर्वी भारत के कई क्षेत्रों में तापमान लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है। मंगलवार दोपहर को भारत ने वैश्विक तापमान चार्ट में अपनी स्थिति को बनाए रखा। दोपहर लगभग 2:30 बजे AQI.in की लाइव तापमान रैंकिंग के अनुसार, दुनिया के 100 सबसे गर्म शहरों में सभी भारत में स्थित थे। यह स्थिति देशभर में जारी गर्मी की लहर की तीव्रता और व्यापकता को दर्शाती है। रैंकिंग से यह स्पष्ट हुआ कि दोपहर होते-होते तापमान में और वृद्धि हुई, यहां तक कि सूची में सबसे नीचे के शहरों में भी तापमान 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।


प्रमुख शहरों में गर्मी का असर

इस सूची में केवल छोटे कस्बे ही नहीं, बल्कि प्रमुख शहर भी शामिल हैं। नई दिल्ली, फरीदाबाद, चंडीगढ़, जम्मू, आगरा, अयोध्या, ग्वालियर, कोटा और रायपुर जैसे शहरों में भीषण लू का प्रभाव देखा गया। दोपहर तक चंडीगढ़, जम्मू, बठिंडा, पठानकोट, बरेली, झांसी, कैथल और हरिद्वार जैसे कई शहरों में तापमान 46 डिग्री के दायरे में पहुंच गया। उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के कई शहरों में तापमान 45 डिग्री के आसपास दर्ज किया गया।


पूर्वी भारत में भीषण गर्मी

पूर्वी भारत भी इस संकट से अछूता नहीं है। आसनसोल और दुर्गापुर में तापमान 45 डिग्री तक पहुंच गया, जबकि धनबाद में पारा 44 डिग्री दर्ज किया गया। नई दिल्ली वैश्विक सूची में 99वें और फरीदाबाद 100वें स्थान पर रहे, जहां तापमान 44 डिग्री था। यह स्थिति दर्शाती है कि लू अब केवल कुछ राज्यों तक सीमित नहीं रही, बल्कि उत्तर, मध्य और पूर्वी भारत के बड़े हिस्से को प्रभावित कर चुकी है।


मौसम विभाग की चेतावनी

भारतीय मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में राहत की संभावना कम बताई है। विभाग के अनुसार राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, मध्य प्रदेश और विदर्भ में इस सप्ताह लू से लेकर भीषण लू की स्थिति बनी रह सकती है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 19 से 24 मई तक और पूर्वी उत्तर प्रदेश में 21 मई तक गंभीर गर्मी की चेतावनी जारी की गई है।


गर्मी की तीव्रता और कारण

विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार की गर्मी सामान्य मौसमी चक्र से कहीं अधिक खतरनाक बनती जा रही है। बेंगलुरु स्थित तक्षशिला संस्थान के भूस्थानिक अनुसंधान कार्यक्रम के प्रमुख प्रोफेसर वाई नित्यानंदम के अनुसार, अप्रैल और मई में उत्तर पश्चिम और मध्य भारत में अधिक गर्मी होना सामान्य है, लेकिन इस वर्ष गर्मी की तीव्रता, लंबे समय तक बने रहना और उसका अत्यधिक फैलाव चिंता का विषय है। रात के समय भी ठंडक की कमी से हालात और गंभीर हो रहे हैं।


जलवायु परिवर्तन का प्रभाव

विशेषज्ञों ने बताया कि कम वर्षा, लगातार शुष्क वायु प्रवाह, तेजी से बढ़ता शहरीकरण और हरित क्षेत्र में कमी ने स्थिति को और विकट बना दिया है। जलवायु परिवर्तन भी इस संकट को कई गुना बढ़ा रहा है। अब लू की घटनाएं पहले की तुलना में अधिक बार, अधिक समय तक और अधिक तीव्रता के साथ देखने को मिल रही हैं।


बिजली की मांग में वृद्धि

भीषण गर्मी का असर देश की बिजली व्यवस्था पर भी साफ दिखाई दे रहा है। मंगलवार को देश में बिजली की मांग नया रिकॉर्ड बनाते हुए 260 गीगावाट तक पहुंच गई। इससे पहले सोमवार को मांग 258 गीगावाट दर्ज की गई थी। यह आंकड़ा अप्रैल में बने 256 गीगावाट के पुराने रिकॉर्ड से भी अधिक है। बिजली की बढ़ती मांग का मुख्य कारण घरों और दफ्तरों में तेजी से बढ़ते शीतलन उपकरणों का उपयोग है।


बांदा जिला: गर्मी का केंद्र

उत्तर प्रदेश का बांदा जिला इस गर्मी में विशेष रूप से चर्चा में है। बुंदेलखंड क्षेत्र का यह जिला पिछले एक महीने में दो बार दुनिया का सबसे गर्म शहर और तीन बार एशिया का सबसे गर्म स्थान बन चुका है। सोमवार को यहां तापमान 47.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो पिछले 75 वर्षों में मई महीने का सबसे अधिक तापमान है। विशेषज्ञों का कहना है कि बांदा केवल मौसमीय कारणों से नहीं, बल्कि मानवीय गतिविधियों के कारण भी अत्यधिक गर्म हो रहा है। लगातार घटती हरियाली, सूखती नदियां, पत्थरीली जमीन और रेत खनन ने इसे कृत्रिम गर्म द्वीप में बदल दिया है।