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भारत में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: पुतिन और जिनपिंग की भागीदारी की पुष्टि

भारत इस सितंबर में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेज़बानी करने जा रहा है, जिसमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भागीदारी की पुष्टि हुई है। यह सम्मेलन वैश्विक नेताओं के बीच महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा का मंच बनेगा। भारत-चीन संबंधों पर इसके प्रभाव और ब्रिक्स समूह के भीतर के मतभेदों को सुलझाने की भारत की भूमिका पर भी ध्यान दिया जाएगा। जानें इस सम्मेलन के महत्व और इसके संभावित परिणामों के बारे में।
 

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की तैयारी

भारत इस सितंबर में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेज़बानी करने जा रहा है, जो विश्व नेताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक का स्थल बनेगा। रूस ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भागीदारी की पुष्टि की है, जबकि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के इस सम्मेलन में शामिल होने की संभावना है। दक्षिण अफ्रीका स्थित रूसी दूतावास ने पुतिन की भागीदारी की पुष्टि की है। एक रिपोर्ट के अनुसार, रूसी अधिकारियों ने भी इस बात की पुष्टि की है। समाचार में बताया गया है कि शी जिनपिंग की भागीदारी इस सम्मेलन में सबसे अधिक प्रतीक्षित यात्रा है। यदि शी जिनपिंग भारत आते हैं, तो यह उनकी अक्टूबर 2019 के बाद पहली यात्रा होगी, जब उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से तमिलनाडु के मामल्लापुरम में मुलाकात की थी.


भारत-चीन संबंधों पर प्रभाव

जून 2020 में गलवान घाटी में हुई झड़पों और दिसंबर 2022 में तवांग सीमा पर तनाव ने भारत-चीन संबंधों को प्रभावित किया है। मोदी और शी जिनपिंग की पहली मुलाकात रूस के कज़ान में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी। इस बार का शिखर सम्मेलन और रूस तथा चीन के नेताओं की उपस्थिति महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें प्रमुख भूराजनीतिक मुद्दों पर चर्चा होगी। 11 सदस्यीय ब्रिक्स समूह के उप विदेश मंत्रियों के बीच हाल की वार्ता में मतभेद स्पष्ट हुए हैं, जिसमें कोई संयुक्त बयान जारी नहीं हो सका।


भारत की भूमिका

भारत, जो जनवरी 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता ग्रहण करेगा, अब इन आंतरिक मतभेदों को सुलझाने और वैश्विक परिदृश्य में समूह को एकजुट रखने के लिए तैयार है। नई दिल्ली इस बार 'चीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता' के विषय पर 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेज़बानी करेगा। दक्षिण अफ्रीका 2010 में इस समूह में शामिल हुआ, जिससे ब्रिक का नाम बदलकर ब्रिक्स हो गया। हाल के वर्षों में, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और इंडोनेशिया के शामिल होने से इस समूह का भूराजनीतिक और आर्थिक प्रभाव बढ़ा है।