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भारत में पेट्रोल-डीजल निर्यात पर टैक्स में कटौती का बड़ा फैसला

भारत सरकार ने पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर टैक्स में कटौती का निर्णय लिया है, जिससे तेल कंपनियों को राहत मिलेगी। इस कदम का उद्देश्य घरेलू बाजार में तेल की कमी को रोकना है, लेकिन इससे निर्यात बढ़ने की संभावना भी है। जानें इस फैसले का आम जनता पर क्या असर पड़ेगा और क्या इससे पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई राहत मिलेगी।
 

पेट्रोल-डीजल निर्यात पर टैक्स में कटौती

ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है। हाल के दिनों में, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने के कारण भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कई बार वृद्धि हुई है। इस स्थिति के बीच, सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। केंद्र सरकार ने तेल कंपनियों द्वारा निर्यात किए जाने वाले पेट्रोल, डीजल और एटीएफ पर एक्सपोर्ट ड्यूटी में कमी की है।


सरकार के इस कदम से तेल कंपनियों को राहत मिलेगी। हाल ही में, केंद्र ने 15 दिन बाद पेट्रोल, डीजल और एविएशन टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में कटौती की है। पेट्रोल पर टैक्स को 3 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 1.5 रुपये प्रति लीटर किया गया है, जबकि डीजल पर यह 16.5 रुपये से घटकर 13.5 रुपये प्रति लीटर हो गया है। एटीएफ पर टैक्स को 9.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।


इस टैक्स कटौती से तेल कंपनियों के लिए पेट्रोल, डीजल और एटीएफ का निर्यात करना आसान हो जाएगा। 1 जून से, कंपनियों को पेट्रोल के निर्यात पर 1.50 रुपये प्रति लीटर और डीजल के निर्यात पर 13.50 रुपये प्रति लीटर का टैक्स देना होगा। सरकार ने मिडिल ईस्ट संकट के कारण घरेलू बाजार में तेल की कमी से बचने के लिए पहले टैक्स बढ़ाया था, लेकिन अब इसमें कटौती कर दी गई है।



सरकार का यह निर्णय घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की उपलब्धता को बनाए रखने का आश्वासन देता है। हालांकि, टैक्स में कमी से निर्यात बढ़ने की संभावना है, जिससे तेल कंपनियों को अधिक लाभ हो सकता है। यदि कंपनियां अधिक तेल निर्यात करने लगती हैं, तो यह स्थिति और भी जटिल हो सकती है। सरकार हर 15 दिन में इस मामले की समीक्षा करेगी।