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भारत में डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का तेजी से विस्तार

भारत में स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल बनाने की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत करोड़ों स्वास्थ्य खाते खोले जा चुके हैं और स्वास्थ्य रिकॉर्ड्स को जोड़ा गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने हाल ही में इस मिशन की प्रगति की समीक्षा की, जिसमें डिजिटल स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने की योजनाओं पर चर्चा की गई। जानें इस पहल के तहत स्वास्थ्य सेवाओं में क्या बदलाव आए हैं और कैसे यह नागरिकों को सशक्त बना रहा है।
 

डिजिटल स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र का विकास

भारत में स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल रूप में लाने की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया है कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) अब दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्रों में से एक बन चुका है। इस मिशन के तहत 93.95 करोड़ से अधिक आयुष्मान भारत खाते खोले जा चुके हैं। इसके साथ ही, लगभग 105 करोड़ स्वास्थ्य रिकॉर्ड्स को भी इस प्रणाली में जोड़ा गया है। राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य रजिस्ट्री में 5.33 लाख स्वास्थ्य केंद्रों और 9.85 लाख स्वास्थ्य पेशेवरों का पंजीकरण किया गया है।


स्वास्थ्य केंद्रों में डिजिटल सॉफ्टवेयर का उपयोग

मंत्रालय के एक आधिकारिक बयान के अनुसार, इस डिजिटल पहल के अंतर्गत देश के 2.72 लाख स्वास्थ्य केंद्रों ने एबीडीएम-सक्षम सॉफ्टवेयर को अपनाया है। इससे अस्पतालों में ओपीडी पंजीकरण की प्रक्रिया सरल और तेज हो गई है। अब तक लगभग 24 करोड़ 'स्कैन और रजिस्टर' टोकन जारी किए जा चुके हैं, जिससे मरीजों की स्वास्थ्य संबंधी जानकारियों का सुरक्षित और सुगम आदान-प्रदान संभव हो सका है।


मिशन स्टीयरिंग ग्रुप की बैठक

हाल ही में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा की अध्यक्षता में 'मिशन स्टीयरिंग ग्रुप' की तीसरी बैठक में इस प्रगति की समीक्षा की गई। बैठक में देश के डिजिटल स्वास्थ्य ढांचे को और मजबूत करने की योजनाओं पर चर्चा की गई। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचा नागरिकों को उनके स्वास्थ्य रिकॉर्ड तक सुरक्षित और सहमति-आधारित पहुंच प्रदान कर रहा है।


स्वास्थ्य सेवाओं की समावेशिता

स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी कहा कि सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए तकनीक को एक प्रभावी माध्यम के रूप में कार्य करना चाहिए। उन्होंने यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया कि सभी नागरिकों के लिए स्वास्थ्य सेवाएं समावेशी, सुलभ और उपयोग में आसान हों। बैठक में मिशन स्टीयरिंग ग्रुप ने पिछली बैठक के निर्णयों की प्रगति की भी समीक्षा की।


सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का एकीकरण

बयान में बताया गया कि बैठक में मॉडल डिस्ट्रिक्ट, मॉडल स्वास्थ्य केंद्र और आरोग्य सेतु 2.0 जैसी पहलों के माध्यम से राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों में एबीडीएम के तेजी से विस्तार की सराहना की गई। इसके अलावा, आयुष्मान भारत पीएम-जेएवाई, सीजीएचएस, ईएसआईसी और निक्षय जैसी प्रमुख सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के साथ इसके एकीकरण को मजबूत करने की दिशा में हुई प्रगति को भी सराहा गया।