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भारत में गर्मी से बढ़ती मौतों का खतरा: 3400 जानें एक दिन में

भारत में गर्मी से होने वाली मौतों का आंकड़ा चिंताजनक स्तर पर पहुंच गया है। हालिया अध्ययन के अनुसार, एक दिन में 3,400 मौतें हो सकती हैं, जबकि लगातार पांच दिन की हीटवेव के दौरान यह संख्या 30,000 तक पहुंच सकती है। गर्मी की तीव्रता और उसके प्रभावों पर चर्चा करते हुए, विशेषज्ञों ने इसे एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बताया है। जानें इस समस्या के पीछे के कारण और इससे निपटने के उपाय क्या हैं।
 

गर्मी से होने वाली मौतों का बढ़ता आंकड़ा

क्या अत्यधिक गर्मी के कारण एक ही दिन में 3,400 लोगों की मौत हो सकती है? यदि हां, तो यह एक गंभीर समस्या है, जो कोरोना महामारी से भी अधिक खतरनाक साबित हो सकती है। हाल ही में, देश में गर्मी के चलते हुई कुछ मौतों के आंकड़े एकत्र किए गए, जिससे पता चला कि मरने वालों की संख्या देखकर लोग हैरान रह गए। भारत जैसे विशाल और घनी आबादी वाले देश में, हीटस्ट्रोक से होने वाली मौतों के सरकारी आंकड़े अक्सर कम होते हैं। गर्मी से होने वाली मौतों को किसी विशेष श्रेणी में दर्ज नहीं किया जाता, जिससे वास्तविक संख्या प्रशासन द्वारा प्रदर्शित आंकड़ों से कहीं अधिक हो सकती है.


गर्मी की तीव्रता और उसके प्रभाव

देश में ‘काल’ बनकर नाच रही गर्मी; एक दिन में 3400, पांच दिन में 30 हजार जान जाने का खतरा!


इस वर्ष, भारत के कई हिस्सों में तापमान 46 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया है। इस गर्मी के मौसम में, एक्सट्रीम हीट का मुद्दा फिर से चर्चा में आया है। हर साल गर्मी की तीव्रता बढ़ती जा रही है। एक नई अध्ययन से पता चला है कि एक दिन की अत्यधिक गर्मी लगभग 3,400 अतिरिक्त मौतों का कारण बन सकती है, जबकि लगातार पांच दिन की हीटवेव के दौरान यह संख्या 30,000 तक पहुंच सकती है।


भारत में गर्मी का बढ़ता संकट

भारत लंबे समय से भीषण गर्मी का सामना कर रहा है। पिछले कुछ वर्षों में, हीटवेव की अवधि और तीव्रता दोनों में वृद्धि हुई है। 2024 में, राजस्थान के कुछ क्षेत्रों में तापमान 50.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। दिल्ली ने हाल के वर्षों में सबसे गर्म रातों का रिकॉर्ड तोड़ा है। 2026 में, दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान सहित कई राज्यों में गंभीर हीट अलर्ट जारी किए गए हैं।


इस वर्ष एक नई समस्या सामने आई है - गर्म रातें। पहले रात के समय कुछ राहत मिल जाती थी, लेकिन अब शहरी क्षेत्रों में कंक्रीट और इमारतों के कारण रात में भी तापमान उच्च बना रहता है।


गर्मी से प्रभावित वर्ग

इसका प्रभाव भारत के करोड़ों लोगों पर पड़ा है, विशेषकर किसानों, ई-रिक्शा चालकों, निर्माण श्रमिकों और बुजुर्गों पर। ये लोग लंबे समय तक 45 डिग्री की धूप में रहते हैं और इसलिए बढ़ते तापमान के प्रति अधिक संवेदनशील हो गए हैं।


अध्ययन के परिणाम और भी चिंताजनक हैं, क्योंकि गर्मी से संबंधित कई मौतों को हीटस्ट्रोक नहीं माना जाता। कमजोर और गरीब तबके में ऐसी मौतें अक्सर हार्ट अटैक या सांस संबंधी बीमारियों के रूप में दर्ज की जाती हैं।


उत्तर प्रदेश की चिंताजनक स्थिति

उत्तर प्रदेश, जो देश का सबसे अधिक जनसंख्या वाला राज्य है, हीटस्ट्रोक से प्रभावित लोगों की संख्या में सबसे आगे है। अध्ययन में यूपी को सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में से एक बताया गया है। अनुमान है कि यहां पांच दिन की हीटवेव के दौरान 8,000 से अधिक अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं।


जीवन रक्षा के उपाय

विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे पृथ्वी का तापमान बढ़ता है, हीटवेव की समस्याएं और भी गंभीर होती जाएंगी। लोगों की जान बचाने के लिए बेहतर अलर्ट सिस्टम और स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता है। यह अध्ययन इस बात पर जोर देता है कि भयानक गर्मी अब केवल असुविधा नहीं, बल्कि एक सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बन चुकी है, जिस पर गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है।