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भारत में गर्मी की लहर: जानें वेट-बल्ब तापमान का खतरा

भारत में भीषण गर्मी की लहर ने लोगों को परेशान कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि वेट-बल्ब तापमान की स्थिति बेहद खतरनाक हो सकती है, जिससे स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। जानें इस गर्मी के पीछे के कारण और इससे बचने के उपाय।
 

भारत में भीषण गर्मी का सामना

देशभर में गर्मी की स्थिति अत्यंत गंभीर हो गई है। लोग दिन के समय बाहर निकलने से बच रहे हैं, खासकर सुबह और शाम के समय। उत्तर, मध्य और पूर्वी भारत में इस सप्ताह के अंत तक तेज गर्मी की लहर चलने की संभावना है। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश और विदर्भ जैसे राज्यों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच सकता है। हालांकि, 29 मई के बाद कुछ राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन इससे पहले IMD ने तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल, कोंकण, गोवा और गुजरात के कुछ हिस्सों में गर्म और नमी वाली स्थिति की चेतावनी दी है।


जलवायु विश्लेषकों की चेतावनी

पुर्तगाली जलवायु विश्लेषक ब्रूनो ब्रेजेंस्की ने भारत के कुछ क्षेत्रों में गर्मी और नमी के खतरनाक संयोजन के बारे में गंभीर चेतावनी दी है। उन्होंने बताया कि जहां तापमान लगभग 55 डिग्री सेल्सियस है, वहां वेट-बल्ब तापमान 33 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जो मानव जीवन के लिए अत्यंत खतरनाक है। ऐसी स्थिति में कोई व्यक्ति दो घंटे से अधिक समय तक सुरक्षित नहीं रह सकता, जबकि बच्चे और बुजुर्ग आधे घंटे में ही बीमार पड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि बढ़ता वैश्विक तापमान भारत को भविष्य में बार-बार जानलेवा गर्मी की घटनाओं का सामना करने के लिए मजबूर कर सकता है।


वेट-बल्ब तापमान की समझ

वेट-बल्ब तापमान को गर्मी की स्थिति की गंभीरता का एक सटीक संकेतक माना जाता है, क्योंकि यह हवा के तापमान को आर्द्रता के स्तर के साथ जोड़ता है। जब हवा में नमी अधिक होती है, तो पसीना जल्दी सूख नहीं पाता, जिससे शरीर को ठंडा करने में कठिनाई होती है। 35 डिग्री सेल्सियस के आसपास वेट-बल्ब तापमान को आमतौर पर जानलेवा माना जाता है।


गर्मी के खतरनाक प्रभाव

35 डिग्री सेल्सियस के वेट-बल्ब तापमान पर, शरीर खुद को ठंडा नहीं कर पाता, जिससे हाइपरथर्मिया और हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। वैज्ञानिक गीले कपड़े में लिपटे थर्मामीटर का उपयोग करके वेट-बल्ब तापमान मापते हैं। वेट-बल्ब रीडिंग जितनी वास्तविक हवा के तापमान के करीब होती है, उतनी ही अधिक नमी और खतरनाक स्थिति होती है।


बेहोशी का खतरा

2020 में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि लोग 35 डिग्री सेल्सियस के वेट-बल्ब तापमान में लंबे समय तक जीवित नहीं रह सकते। NASA के शोधकर्ता कॉलिन रेमंड ने बताया कि जब वेट-बल्ब का तापमान शरीर के तापमान के करीब पहुंच जाता है, तो पसीना बेअसर हो जाता है। लंबे समय तक संपर्क में रहने से हीट स्ट्रोक, अंगों का विफल होना, भ्रम, बेहोशी, कोमा और मृत्यु हो सकती है। भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान के आंकड़ों के अनुसार, भारत के मुख्य हीटवेव क्षेत्रों में हीटवेव की आवृत्ति 1961 से हर दशक में लगभग 2.5 दिन बढ़ी है।