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भारत में एलपीजी की कमी पर चिंता, सरकार ने उठाए कदम

भारत में द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) की कमी को लेकर सरकार ने ईंधन के विवेकपूर्ण उपयोग की अपील की है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने बताया कि पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता पर्याप्त है। प्रवर्तन कार्रवाई के तहत हजारों छापे मारे गए हैं और कई सिलेंडर जब्त किए गए हैं। खाड़ी क्षेत्र में भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर भी सकारात्मक जानकारी दी गई है। जानें इस मुद्दे पर और क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
 

एलपीजी की कमी और सरकार के प्रयास

द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) की संभावित कमी को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच, केंद्र सरकार ने सोमवार को ईंधन के विवेकपूर्ण उपयोग की अपील की और पाइपलाइन द्वारा प्राकृतिक गैस (पीएनजी) के बुनियादी ढांचे के विस्तार को बढ़ावा देने का संकेत दिया। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव (विपणन एवं तेल शोधन) सुजाता शर्मा ने एक प्रेस वार्ता में बताया कि पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता पर्याप्त है। उन्होंने कहा कि यदि सभी वाणिज्यिक एलपीजी उपभोक्ता पीएनजी पर निर्भर हो जाएं, तो यह एक लाभकारी कदम होगा।


प्रवर्तन कार्रवाई और छापे

शर्मा ने प्रवर्तन कार्रवाई के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि हाल के दिनों में लगभग बारह हजार छापे मारे गए हैं, जिसमें लगभग पंद्रह हजार सिलेंडर जब्त किए गए हैं। दिल्ली में कल लगभग छह सौ सिलेंडर जब्त किए गए, जबकि उत्तर प्रदेश में चार सौ पचास निरीक्षण किए गए हैं। जम्मू और कश्मीर में भी एफआईआर दर्ज की गई हैं और गिरफ्तारियां हुई हैं। केरल में एक हजार छापे और मध्य प्रदेश में बारह सौ छापे मारे गए हैं। इसके अलावा, तेल विपणन कंपनियों की निरीक्षण टीमों ने लगभग ढाई हजार खुदरा दुकानों और एलपीजी वितरकों पर अचानक निरीक्षण किए हैं।


खाड़ी क्षेत्र में भारतीय नाविकों की सुरक्षा

भारत सरकार के जहाजरानी मंत्रालय के राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि खाड़ी क्षेत्र में सभी भारतीय नाविक और जहाज सुरक्षित हैं। पिछले 24 घंटों में, 161 भारतीय नाविकों को स्वदेश वापस लाया गया है। दूसरा एलपीजी वाहक, नंदा देवी, आज सुबह लगभग 2:30 बजे कांडला पहुंचा है, और अब दोनों एलपीजी वाहकों से माल उतारा जा रहा है। माल उतारने की प्रक्रिया जहाज-से-जहाज की जा रही है।


कंटेनरों की स्थिति पर स्पष्टीकरण

सिन्हा ने आज सुबह एक समाचार रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह पर लगभग 450 कंटेनर सड़क पर पड़े होने की बात निराधार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कंटेनर सीएफएस (कंटेनर फ्रेट स्टेशन), गोदाम और कारखाने परिसर में हैं, जो जेएनपीए की नीति के अनुसार है।