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भारत में ईद-उल-अजहा पर जानवरों की कुर्बानी का आंकड़ा

ईद-उल-अजहा, जिसे बकरीद के नाम से भी जाना जाता है, इस्लाम में एक महत्वपूर्ण त्योहार है। इस अवसर पर भारत में हर साल लाखों जानवरों की कुर्बानी दी जाती है। हालांकि, सरकारी आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन अनुमानित आंकड़े बताते हैं कि लगभग 1 करोड़ से 1.5 करोड़ बकरों और भेड़ों की कुर्बानी होती है। जानिए इस त्योहार पर जानवरों की मांग और विभिन्न राज्यों में कुर्बानी के आंकड़े के बारे में।
 

ईद-उल-अजहा का महत्व


ईद-उल-अजहा, जिसे बकरीद भी कहा जाता है, इस्लाम में मुस्लिमों का दूसरा सबसे बड़ा त्योहार है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में जानवरों की कुर्बानी दी जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में हर साल कितने जानवरों की कुर्बानी होती है? इसका उत्तर वाकई चौंकाने वाला है।


कितने जानवरों की होती है कुर्बानी?

भारत में ईद-उल-अजहा के दौरान कितने बकरों, भेड़ों और अन्य जानवरों की कुर्बानी होती है, यह एक महत्वपूर्ण सवाल है।


सरकारी आंकड़ों की कमी

हालांकि, भारत सरकार इस त्योहार पर होने वाली कुर्बानी का कोई आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं करती है।


अनुमानित आंकड़े

पशुपालन संगठनों और स्वतंत्र विश्लेषकों के अनुसार, इस विषय पर कुछ मोटे अनुमान जरूर हैं।


कुर्बानी का अनुमानित आंकड़ा

कई रिपोर्टों के अनुसार, ईद-उल-अजहा के दौरान भारत में लगभग 1 करोड़ से 1.5 करोड़ बकरों और भेड़ों की कुर्बानी दी जाती है।


किस प्रकार के जानवरों की होती है कुर्बानी?

यह आंकड़ा विभिन्न राज्यों और बाजारों के अनुमानों को मिलाकर तैयार किया गया है। ईद पर भैंस, भेड़ और अन्य गैर प्रतिबंधित जानवरों की भी कुर्बानी होती है।


बकरों की मांग

भारत में बकरों की सबसे अधिक मांग होती है। खासकर उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल और दिल्ली के बाजारों में बकरों की बिक्री सबसे ज्यादा होती है।


शहरी बाजारों में मांग

दिल्ली, हैदराबाद, मुंबई, लखनऊ और कोलकाता जैसे शहरों में ईद से पहले बड़ी पशु मंडियां सजती हैं। हजारों व्यापारी राजस्थान, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से बकरों को लेकर आते हैं।