भारत-पाकिस्तान संबंधों पर दत्तात्रेय होसबले का दृष्टिकोण
भारत को पाकिस्तान के खिलाफ ठोस कदम उठाने चाहिए
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के महासचिव दत्तात्रेय होसबले ने मंगलवार को कहा कि भारत को पाकिस्तान और सीमा पार आतंकवाद के प्रति सख्त प्रतिक्रिया जारी रखनी चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि सरकार को बातचीत के लिए दरवाजे खुले रखने चाहिए। होसबले ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में उठाए गए कदमों का उल्लेख किया, जिन्होंने आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए कूटनीति का सहारा लिया था। उन्होंने कहा कि वाजपेयी ने तनावपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद पाकिस्तान के साथ संबंध बनाए रखने के लिए बस से लाहौर की यात्रा की।
संवाद के लिए दरवाजे खुले रखने की आवश्यकता
एक पॉडकास्ट में होसबले ने कहा कि अब तक सभी संभव प्रयास किए जा चुके हैं, लेकिन ऐसे प्रयासों को जारी रखना चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि अटल जी ने बातचीत की कोशिश की थी और कई महत्वपूर्ण घटनाएँ घटी थीं। वर्तमान प्रधानमंत्री ने भी शपथ ग्रहण के समय पाकिस्तान को आमंत्रित किया था। होसबले ने पाकिस्तान को एक छोटी सी मूँछ बताते हुए कहा कि यदि पाकिस्तान पुलवामा जैसी घटनाएँ पैदा करने की कोशिश कर रहा है, तो हमें उचित प्रतिक्रिया देनी होगी।
संवाद और खेल संबंधों का महत्व
उन्होंने यह भी कहा कि भारत को संवाद के द्वार पूरी तरह बंद नहीं करने चाहिए। संवाद के लिए हमेशा तत्पर रहना चाहिए, इसलिए राजनयिक संबंध, व्यापार और वाणिज्य जारी रहना चाहिए। खेल संबंधों को भी बनाए रखना चाहिए, क्योंकि यह नागरिक समाज के रिश्तों को मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक संबंधों के कारण हम कभी एक राष्ट्र रहे हैं और यही उम्मीद है कि अंततः नागरिक समाज के रिश्ते सफल होंगे।