भारत-पाकिस्तान के बीच UNSC में बढ़ी तनाव की स्थिति
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में तनाव का खुलासा
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में 'अफगानिस्तान की स्थिति' पर हुई बैठक में भारत और पाकिस्तान के बीच की राजनयिक खटास एक बार फिर से उजागर हुई। भारत ने पाकिस्तान के झूठे प्रचार का मजबूती से जवाब देते हुए उसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर बेनकाब किया। भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वतनेनी ने पाकिस्तान के आरोपों को पूरी तरह से खारिज करते हुए इसे "धार्मिक शब्दावली में लिपटा आधिकारिक रूप से प्रायोजित गलत सूचना फैलाने का अभियान" बताया।
'फितना अल-हिंदुस्तान' का सच
पाकिस्तानी मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान सरकार ने बलूचिस्तान प्रांत में सक्रिय आतंकवादी समूहों को आधिकारिक तौर पर 'फितना अल-हिंदुस्तान' करार दिया। पाकिस्तान ने बिना किसी प्रमाण के यह आरोप लगाया कि ये संगठन भारत के इशारे पर कार्य कर रहे हैं। इस पर भारतीय राजदूत ने कड़ा विरोध जताते हुए कहा, "पाकिस्तान ने सरकारी अधिसूचनाएं जारी कर अपनी एजेंसियों को निर्देश दिया है कि वे अपनी सीमाओं के भीतर सक्रिय समूहों को 'फितना अल-हिंदुस्तान' कहें। यह पाकिस्तान के सत्ता प्रतिष्ठान द्वारा संचालित नफरत की एक संगठित फैक्टरी का परिणाम है, जिसका उद्देश्य अपने नागरिकों को भारत के खिलाफ स्थायी शत्रुता में रखना है।"
पाकिस्तान की आंतरिक समस्याओं से ध्यान भटकाना
उन्होंने आगे कहा कि इस दुष्प्रचार का असली उद्देश्य पाकिस्तान की जनता का ध्यान वहां की गंभीर राजनीतिक और आर्थिक समस्याओं से हटाना है, ताकि सत्ता प्रतिष्ठान राष्ट्रीय संसाधनों पर अपना नियंत्रण बनाए रख सके।
संविधान संशोधन और सैन्य तख्तापलट
पर्वतनेनी ने कहा कि '27वें संविधान संशोधन' के माध्यम से सेना द्वारा किया गया तख्तापलट इसका एक ताजा उदाहरण है। उन्होंने पाकिस्तान की संसद द्वारा पिछले वर्ष पारित संविधान संशोधन का उल्लेख किया, जिसके तहत 'चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज' (सीडीएफ) का पद स्थापित किया गया। इसके बाद फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को पाकिस्तान का पहला सीडीएफ नियुक्त किया गया।
अफगानिस्तान पर पाकिस्तान के हमलों की निंदा
यूएनएससी की बैठक में भारतीय दूत ने पाकिस्तान के अफगानिस्तान पर सैन्य हवाई हमलों की भी कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा, "मैं फिर से दोहराता हूं, किसी नरसंहार को सैन्य अभियान का रूप देने से अपराधी की जिम्मेदारी समाप्त नहीं होती। आम नागरिकों की हत्या करना और बच्चों को अनाथ बनाना आतंकवाद-रोधी कार्रवाई नहीं है।"
पाकिस्तान की पुरानी आदत
उन्होंने कहा कि रमजान के पवित्र महीने में बेरहमी से हवाई हमले करना और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करना पाखंड का एक स्पष्ट उदाहरण है। भारतीय दूत ने यह भी कहा कि पड़ोसियों को अपनी नाकामियों के लिए दोष देना पाकिस्तान की पुरानी आदत है और दुनिया को गुमराह करने की यह कोशिश असफल होगी।