भारत पर संयुक्त राष्ट्र की नई रिपोर्ट में गंभीर आरोप
हाल ही में संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में भारत पर इजराइल के साथ संबंधों को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। यूएन के विशेष दूत फ्रांसिस्का अल्बानीज़ ने भारत की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन कर रहा है। रिपोर्ट में गाजा की जेलों की स्थिति को 'टॉर्चर कैंप' बताया गया है, जिसमें हजारों लोग गिरफ्तार और गायब हैं। इस रिपोर्ट ने वैश्विक स्तर पर भारत की जिम्मेदारियों पर बहस को तेज कर दिया है। जानें इस रिपोर्ट में और क्या कहा गया है।
Apr 22, 2026, 14:01 IST
भारत के खिलाफ यूएन की रिपोर्ट
संयुक्त राष्ट्र की एक हालिया रिपोर्ट में भारत पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं, खासकर इजराइल के साथ संबंधों को लेकर। यूएन के विशेष दूत फ्रांसिस्का अल्बानीज़ ने भारत की भूमिका पर एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। इस रिपोर्ट में भारत पर अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है, विशेष रूप से इजराइल को हथियारों की आपूर्ति को लेकर। यह रिपोर्ट यूएन मानवाधिकार परिषद में प्रस्तुत की गई है, जिसमें इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस के फैसलों का भी उल्लेख किया गया है। इस मुद्दे पर वैश्विक स्तर पर बहस तेज हो गई है।
अल्बानीज़ ने यूएन मानवाधिकार परिषद में अपनी रिपोर्ट 'टॉर्चर एंड जेनोसाइड' (यातना और नरसंहार) पेश की। इसमें आरोप लगाया गया है कि अक्टूबर 2023 से इजराइल ने एक सुनियोजित तरीके से फिलिस्तीनियों पर अत्याचार किया है।
गाजा की स्थिति और भारत की जिम्मेदारी
रिपोर्ट में गाजा की जेलों की स्थिति को एक 'विशाल टॉर्चर कैंप' के रूप में वर्णित किया गया है। इसमें कहा गया है कि 18,500 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें 1,500 बच्चे भी शामिल हैं, और 4,000 से अधिक लोग गायब हो गए हैं। भारत के संदर्भ में, अल्बानीज़ ने कहा कि जब इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर युद्ध अपराधों और मानवता के खिलाफ अपराधों के आरोप लगे हैं, तो भारत अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन कर रहा है, और इसके लिए उसे भी जवाबदेह ठहराया जा सकता है।
भारत और इजराइल के संबंधों पर चिंता
अल्बानीज़ ने यह भी कहा कि भारत और इजराइल के बीच राजनीतिक और रक्षा संबंधों का निरंतर बने रहना, रिपोर्ट में वर्णित हिंसा के तंत्र को बढ़ावा देने का खतरा पैदा करता है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह के संबंध अंतरराष्ट्रीय कानूनी व्यवस्था को कमजोर कर सकते हैं। अल्बानीज़ ने यह भी बताया कि भारत और इजराइल के बीच ऐतिहासिक समानताएँ हैं, जो ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन से जुड़ी हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों पर अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के भीतर कुछ जिम्मेदारियाँ हैं।