भारत ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की दलीलों को किया खारिज
भारत ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान द्वारा जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर उठाए गए आरोपों का सटीक खंडन किया। भारत की प्रथम सचिव अनुपमा सिंह ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान एक 'खयाली दुनिया' में जी रहा है और वहां लोकतंत्र मजबूत हो रहा है। उन्होंने पाकिस्तान के दुष्प्रचार को खारिज करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय कानूनी और अपरिवर्तनीय है। इस लेख में जानें कि कैसे भारत ने पाकिस्तान की दलीलों को नकारते हुए अपनी स्थिति को स्पष्ट किया।
Feb 27, 2026, 19:22 IST
पाकिस्तान की दलीलें और भारत का जवाब
संयुक्त राष्ट्र के मंच पर एक बार फिर पाकिस्तान की असलियत उजागर हुई, जब उसने जम्मू-कश्मीर के मुद्दे को उठाकर भारत पर आरोप लगाने की कोशिश की। लेकिन इस बार भारत ने तथ्यों के आधार पर ऐसे तर्क प्रस्तुत किए कि इस्लामाबाद की बातें बेमानी साबित हो गईं। भारत की ओर से प्रथम सचिव अनुपमा सिंह ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 61वें नियमित सत्र में स्पष्टता और दृढ़ता से जवाब दिया, जिसने पाकिस्तान को उसकी वास्तविकता का सामना कराया।
भारत ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान एक 'खयाली दुनिया' में जी रहा है। एक ऐसा देश जिसकी अर्थव्यवस्था अंतरराष्ट्रीय कर्ज पर निर्भर है, वह लोकतंत्र और मानवाधिकारों पर भाषण दे रहा है, यह अपने आप में एक विडंबना है। वास्तव में, पाकिस्तान ने आईएमएफ से मांगे गए राहत पैकेज की तुलना में जम्मू-कश्मीर के विकास बजट को दोगुना से अधिक बताया, जो यह दर्शाता है कि कौन प्रगति कर रहा है और कौन कर्ज के जाल में फंसा हुआ है।
पाकिस्तान की स्थिति पर भारत की प्रतिक्रिया
अनुपमा सिंह ने कहा कि पाकिस्तान को यह स्वीकार करने में कठिनाई हो रही है कि जम्मू और कश्मीर में लोकतंत्र मजबूत हो रहा है। हाल के लोकसभा और विधानसभा चुनावों में रिकॉर्ड मतदान इस बात का प्रमाण है कि वहां की जनता ने आतंकवाद और अलगाववाद की विचारधारा को नकार दिया है। यह वही विचारधारा है जिसे पाकिस्तान ने दशकों तक समर्थन दिया। अब घाटी के लोग विकास, रोजगार और स्थिरता की चाह रखते हैं, और भारत सरकार उसी दिशा में कार्य कर रही है।
उन्होंने इस्लामी सहयोग संगठन (ओआईसी) का उल्लेख करते हुए कहा कि पाकिस्तान और ओआईसी द्वारा भारत के संदर्भ में की गई टिप्पणियों के बाद भारत को अपना जवाब देने का अधिकार है। उन्होंने इन आरोपों को पूरी तरह से खारिज किया। अनुपमा ने कहा कि ऐसे देश से लोकतंत्र पर उपदेश सुनना अजीब है जहां असैन्य सरकारें अपने कार्यकाल को पूरा नहीं कर पातीं। उन्होंने चिनाब रेल पुल का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि वह फर्जी है, तो पाकिस्तान भ्रम में जी रहा है।
अनुपमा सिंह ने कहा कि पाकिस्तान का निरंतर दुष्प्रचार अब ईर्ष्या से भरा हुआ प्रतीत होता है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की मनगढ़ंत बयानबाजी इस तथ्य को नहीं बदल सकती कि जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय कानूनी और अपरिवर्तनीय है। उन्होंने पाकिस्तान से अपील की कि वह उन क्षेत्रों को खाली करे जिन पर उसने अवैध कब्जा कर रखा है।
हालांकि, इस्लामी सहयोग संगठन पाकिस्तान के सुर में सुर मिलाते हुए जो भी कहे, लेकिन अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब इन पुरानी दलीलों से प्रभावित नहीं होता। पाकिस्तान को समझना चाहिए कि वैश्विक मंचों पर खोखली बयानबाजी से उसकी आंतरिक आर्थिक और राजनीतिक समस्याएं हल नहीं होंगी। बेहतर होगा कि वह अपनी ऊर्जा आतंकवाद के निर्यात के बजाय अपने नागरिकों के भविष्य को सुधारने में लगाए। भारत आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है, जबकि पाकिस्तान को अपनी वास्तविकता का सामना करना होगा। यही सच्चाई है और यही उसकी असली स्थिति भी है।