भारत ने चिनाब नदी पर नई परियोजनाओं की शुरुआत की, पाकिस्तान को होगा नुकसान
भारत का नया रणनीतिक कदम
नई दिल्ली: भारत ने सिंधु जल संधि (IWT) को रोकने के बाद एक महत्वपूर्ण राजनीतिक और रणनीतिक कदम उठाया है। अब भारत ने पाकिस्तान की ओर बहने वाली चिनाब नदी पर दो प्रमुख परियोजनाओं पर तेजी से काम शुरू कर दिया है। इनमें से एक परियोजना के तहत हिमाचल प्रदेश में एक बड़ी सुरंग का निर्माण किया जाएगा, जिससे चिनाब नदी का पानी मोड़ा जाएगा। दूसरी परियोजना में सलाल बांध पर गाद प्रबंधन क्षमता को बहाल किया जा रहा है। इस गर्मी में पाकिस्तान के लिए यह एक बड़ा झटका साबित हो सकता है।
चिनाब नदी पर सुरंग का निर्माण
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, भारत चिनाब नदी पर एक सुरंग का निर्माण कर रहा है, जिससे नदी का पानी मोड़ा जाएगा। इसके साथ ही नदी के गाद प्रबंधन प्रणाली को भी बहाल किया जा रहा है। इन दोनों परियोजनाओं पर लगभग 2,600 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। इन परियोजनाओं का कार्य नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन (NHPC) के तहत शुरू हो चुका है। चिनाब-ब्यास लिंक टनल प्रोजेक्ट, जिसकी लागत 2,352 करोड़ रुपये है, लाहुल-स्पीति में 8.7 किलोमीटर लंबी सुरंग का निर्माण कर रहा है, जिससे चिनाब का पानी ब्यास नदी में मोड़ा जाएगा।
सुरंग का निर्माण कैसे होगा
न्यूज 18 की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह सुरंग चिनाब के आंतरिक बेसिन से जुड़ी होगी। इसका उद्देश्य चंद्रा नदी के पानी को ब्यास बेसिन की ओर मोड़ना है। यह पानी हाइड्रोलिक ढांचे और सुरंगों के माध्यम से प्रवाहित होगा। पहले चरण के निर्माण में लाहुल घाटी में नदी के ऊपर एक 19 मीटर ऊँचा बैराज भी बनाया जाएगा। चिनाब नदी हिमालय की चंद्रा और भागा नदियों के संगम से बनती है।
हिमालय में सुरंग का महत्व
रिपोर्ट के अनुसार, यह परियोजना लाहौल-स्पीति के ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्र में स्थित है, जो रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। हाल के वर्षों में भारत ने हिमालय क्षेत्र में सड़क, सुरंग और ऊर्जा अवसंरचना का तेजी से विकास किया है। जलमार्ग परिवर्तन स्थल कोसकर गांव के पास और रोहतांग में अटल सुरंग के उत्तरी प्रवेश द्वार के ऊपर स्थित है। अधिकारियों का कहना है कि यह परियोजना केवल जलविद्युत या इंजीनियरिंग से संबंधित नहीं है, बल्कि पश्चिमी नदियों के जल का अधिकतम उपयोग करने से भी संबंधित है।
सिंधु जल संधि पर भारत का सख्त रुख
भारत ने यह कदम उस समय उठाया है, जब नई दिल्ली ने निलंबित सिंधु जल संधि के तहत पश्चिमी नदियों के पानी के उपयोग के प्रति अपना रुख और सख्त कर लिया है। पिछले साल पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद से भारत ने सिंधु जल संधि को रोक दिया था। 1960 में हस्ताक्षरित इस संधि के तहत भारत को पूर्वी नदियों रावी, ब्यास और सतलुज पर असीमित अधिकार प्राप्त हैं, जबकि पाकिस्तान को पश्चिमी नदियों सिंधु, झेलम और चिनाब पर प्राथमिक अधिकार मिला है। भारत ने पश्चिमी नदियों पर जलविद्युत परियोजनाओं के निर्माण का अधिकार अपने पास रखा है।