भारत ने कनाडा को 7 टन मखाना किया निर्यात, कृषि उत्पादों की वैश्विक पहचान में वृद्धि
भारत ने हाल ही में कनाडा को 7 टन मखाना निर्यात किया है, जो बिहार के कृषि उत्पादों की वैश्विक पहचान को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण कदम है। इस निर्यात से न केवल बिहार के किसानों की मेहनत का प्रमाण मिलता है, बल्कि यह स्थानीय उत्पादों की बढ़ती वैश्विक मांग को भी दर्शाता है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस उपलब्धि पर खुशी व्यक्त की है, और APEDA बिहार को एक प्रमुख कृषि-निर्यात केंद्र बनाने के लिए प्रयासरत है।
Jul 31, 2026, 17:02 IST
भारत का मखाना निर्यात
वाणिज्य मंत्रालय ने गुरुवार को जानकारी दी कि भारत ने समुद्री मार्ग से कनाडा को बिहार के प्रसिद्ध मखाने (फॉक्स नट्स) का 7 टन निर्यात किया है। मंत्रालय के अनुसार, यह कदम बिहार के उत्कृष्ट कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजारों में बढ़ावा देने और राज्य के वैल्यू-एडेड कृषि निर्यात की विविधता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण है। इस 7 मीट्रिक टन के कंसाइनमेंट को मुंद्रा पोर्ट के माध्यम से कनाडा की ZKV फूड्स कंपनी को भेजा गया है।
बिहार भारत में मखाना का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। पौष्टिक और स्वास्थ्यवर्धक स्नैक्स की बढ़ती मांग के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मखाने की मांग में वृद्धि हुई है। अधिकारियों का मानना है कि फ्लेवर्ड मखाने के निर्यात से नए अवसर उत्पन्न होंगे और इस प्रमुख कृषि उत्पाद की अंतरराष्ट्रीय पहचान में भी वृद्धि होगी। इस उपलब्धि पर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने खुशी व्यक्त की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि बिहार की समृद्धि अब वैश्विक स्तर पर पहचान बना रही है। कनाडा को 7 मीट्रिक टन मखाने का निर्यात राज्य के किसानों की मेहनत और स्थानीय उत्पादों की बढ़ती वैश्विक मांग का प्रमाण है।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि यह उपलब्धि बिहार को कृषि निर्यात के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों पर ले जाने के साथ-साथ 'लोकल से ग्लोबल' की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उनका संकल्प है कि बिहार का स्थानीय उत्पाद वैश्विक बाजार में अपनी विशिष्ट पहचान बनाए और किसानों की समृद्धि का माध्यम बने। मंत्रालय ने बताया कि APEDA बिहार को एक प्रमुख कृषि-निर्यात केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए प्रयासरत है। इसके लिए क्षमता निर्माण, निर्यात अवसंरचना, गुणवत्ता मानकों का पालन, बाजार संबंध और वैल्यू एडिशन पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। यह संस्था भारत के कृषि-निर्यात इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए राज्य सरकारों, निर्यातकों, किसान उत्पादक संगठनों (FPOs), प्रोसेसर्स और अन्य संबंधित पक्षों के साथ मिलकर काम कर रही है।