भारत ने ईरान से संपर्क साधा, सीजफायर के बाद ऊर्जा सुरक्षा को लेकर उठाए कदम
भारत का ईरान से संपर्क
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर की घोषणा के तुरंत बाद, भारत ने ईरान से संपर्क किया है ताकि होर्मुज के पश्चिम में फंसे उसके तेल और गैस के जहाजों को जल्द से जल्द स्वदेश लाया जा सके। भारत सरकार ने इस युद्ध विराम का स्वागत करते हुए क्षेत्र में स्थायी शांति की उम्मीद जताई है।
सीजफायर का स्वागत
विदेश मंत्रालय द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया है, 'हम इस घोषित युद्ध विराम का स्वागत करते हैं और आशा करते हैं कि यह पश्चिम एशिया में स्थायी शांति की दिशा में एक कदम होगा। जैसा कि हमने पहले भी कहा है, संघर्ष को कम करने के लिए संवाद और कूटनीति आवश्यक हैं।'
ऊर्जा संकट में कमी की उम्मीद
भारत ने आगे कहा कि संघर्ष के कारण पहले ही लोगों को भारी पीड़ा का सामना करना पड़ा है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति तथा व्यापार नेटवर्क प्रभावित हुए हैं। भारत को उम्मीद है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता बनी रहेगी और वैश्विक वाणिज्य का सामान्य प्रवाह बहाल होगा।
सरकार की ऊर्जा सुरक्षा पर चिंता
सरकारी सूत्रों के अनुसार, सीजफायर की घोषणा के बाद भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता कम होने की संभावना है। वर्तमान में, भारत के 16 जहाज होर्मुज के पश्चिमी हिस्से में फंसे हुए हैं, जिनमें अधिकांश तेल और गैस से संबंधित हैं। इन जहाजों में लगभग दो लाख टन से अधिक एलपीजी है, जिसकी भारत को अत्यधिक आवश्यकता है।
विदेश सचिव की अमेरिका यात्रा
इस बीच, भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी आज वाशिंगटन में ट्रंप प्रशासन के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। मिसरी 8-11 अप्रैल तक अमेरिका के दौरे पर हैं। इस बैठक में पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा होने की संभावना है।
भारत की क्षेत्रीय स्थिरता की रणनीति
सूत्रों के अनुसार, यह यात्रा भारत के पश्चिम एशिया के देशों के साथ संपर्क बनाए रखने और क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। विदेश मंत्रालय ने बार-बार यह बताया है कि भारत के लिए क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और ऊर्जा सुरक्षा हमेशा प्राथमिकता रही है।
व्यापारिक जहाजों की आवाजाही
सीजफायर के बाद व्यापारिक जहाजों की आवाजाही सामान्य होने और वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता आने की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे भारत जैसे ऊर्जा आयातक देशों को राहत मिलेगी।