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भारत ने ईरान से संपर्क कर ऊर्जा संकट को हल करने की कोशिश की

भारत ने ईरान से संपर्क किया है ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे तेल और गैस के जहाजों को स्वदेश लाया जा सके। सीजफायर की घोषणा के बाद, भारत ने क्षेत्र में स्थायी शांति की उम्मीद जताई है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस स्थिति से भारत की ऊर्जा सुरक्षा में सुधार की संभावना है। विदेश सचिव विक्रम मिसरी अमेरिका में ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों से मुलाकात करेंगे, जबकि विदेश मंत्री एस. जयशंकर यूएई की यात्रा पर जाएंगे। यह सब भारत की ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करने की रणनीति का हिस्सा है।
 

भारत का ईरान से संपर्क


नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर की घोषणा के तुरंत बाद, भारत ने ईरान से संपर्क किया है ताकि होर्मुज के पश्चिम में फंसे उसके तेल और गैस के जहाजों को जल्द से जल्द स्वदेश लाया जा सके। भारत सरकार ने इस युद्ध विराम का स्वागत करते हुए क्षेत्र में स्थायी शांति की उम्मीद जताई है।

सीजफायर का स्वागत
विदेश मंत्रालय द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया है, 'हम इस घोषित युद्ध विराम का स्वागत करते हैं और आशा करते हैं कि यह पश्चिम एशिया में स्थायी शांति की दिशा में एक कदम होगा। जैसा कि हम पहले से ही कह चुके हैं, संघर्ष को कम करने के लिए संवाद और कूटनीति आवश्यक हैं।'

भारत ने आगे कहा कि संघर्ष के कारण पहले ही लोगों को भारी पीड़ा झेलनी पड़ी है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति तथा व्यापार नेटवर्क प्रभावित हुए हैं। भारत को उम्मीद है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता बनी रहेगी और वैश्विक वाणिज्य का सामान्य प्रवाह बहाल होगा।

ऊर्जा संकट में कमी की उम्मीद
सरकारी सूत्रों के अनुसार, सीजफायर की घोषणा के बाद भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता कम होने की संभावना है। वर्तमान में, भारत के 16 जहाज होर्मुज के पश्चिमी हिस्से में फंसे हुए हैं, जिनमें अधिकांश तेल और गैस से संबंधित हैं। इन जहाजों में लगभग दो लाख टन से अधिक एलपीजी है, जिसकी भारत को अत्यधिक आवश्यकता है।

इन जहाजों को निकालने के लिए भारतीय सरकार ईरान के साथ लगातार संपर्क में है। भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत आयात करता है, जिसमें पश्चिम एशिया से आने वाला हिस्सा लगभग 60 प्रतिशत है।

होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी अस्थिरता से भारत की ऊर्जा आपूर्ति और अर्थव्यवस्था को गंभीर खतरा हो सकता है। पश्चिम एशिया में विवाद शुरू होने के बाद, सरकार की कई कोशिशों के बावजूद उद्योग जगत को गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है और एलपीजी की आपूर्ति पर भी असर पड़ा है।

ट्रंप प्रशासन से मुलाकात
इस बीच, आज भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी वाशिंगटन में ट्रंप प्रशासन के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। मिसरी 8-11 अप्रैल तक अमेरिका के दौरे पर हैं। इस बैठक में पश्चिम एशिया की स्थिति पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है। इसके अलावा, विदेश मंत्री एस. जयशंकर इस सप्ताहांत संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की यात्रा पर जाएंगे।

सूत्रों के अनुसार, यह यात्रा भारत के पश्चिम एशिया के देशों के साथ संपर्क बनाए रखने और क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। विदेश मंत्रालय ने इस दौरान कई बार यह कहा है कि भारत के लिए क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और ऊर्जा सुरक्षा हमेशा प्राथमिकता रही है।

सीजफायर के बाद व्यापारिक जहाजों की आवाजाही सामान्य होने और वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता आने की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे भारत जैसे ऊर्जा आयातक देशों को राहत मिलेगी।