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भारत ने अमेरिका-ईरान युद्धविराम का स्वागत किया, स्थायी शांति की उम्मीद

भारत ने अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए युद्धविराम का स्वागत किया है, यह उम्मीद जताते हुए कि इससे पश्चिम एशिया में स्थायी शांति की स्थापना होगी। विदेश मंत्रालय ने तनाव कम करने, संवाद और कूटनीति की आवश्यकता पर जोर दिया है। इस संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार नेटवर्क को बाधित किया है। जानें इस पर और क्या कहा गया है और अमेरिका के राष्ट्रपति का क्या रुख है।
 

भारत का अमेरिका-ईरान युद्धविराम पर बयान

भारत ने हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच हुए युद्धविराम का स्वागत किया है, यह उम्मीद जताते हुए कि इससे पश्चिम एशिया में स्थायी शांति की स्थापना होगी। विदेश मंत्रालय ने 8 अप्रैल, 2026 को एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि हम इस युद्धविराम का स्वागत करते हैं और आशा करते हैं कि यह क्षेत्र में स्थायी शांति लाएगा। जैसा कि हमने पहले भी कहा है, मौजूदा संघर्ष को समाप्त करने के लिए तनाव को कम करना, संवाद और कूटनीति की आवश्यकता है।


 


विदेश मंत्रालय ने होर्मुज जलडमरूमध्य, जो एक महत्वपूर्ण वैश्विक ऊर्जा गलियारा है, से निर्बाध और सुरक्षित समुद्री यातायात सुनिश्चित करने के महत्व पर भी जोर दिया। मंत्रालय ने समुद्री मार्गों में सामान्य स्थिति बहाल होने की आशा व्यक्त की। बयान में कहा गया कि हम युद्धविराम का स्वागत करते हैं और यह उम्मीद करते हैं कि इससे स्थायी शांति स्थापित होगी।


 


बयान में यह भी उल्लेख किया गया कि इस संघर्ष ने पहले ही लोगों को गंभीर पीड़ा पहुंचाई है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति तथा व्यापार नेटवर्क को बाधित किया है। हमें उम्मीद है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से निर्बाध नौवहन और वैश्विक व्यापार का प्रवाह फिर से शुरू होगा। अमेरिकी राष्ट्रपति ने हाल ही में ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को अस्थायी रूप से स्थगित करने की घोषणा की, जिससे तनाव में कमी आई है।


 


राष्ट्रपति ने इसे दोतरफा युद्धविराम के रूप में वर्णित किया, जिसका अर्थ है कि इस अवधि के दौरान अमेरिका और ईरान दोनों को शत्रुतापूर्ण कार्रवाई से बचने की उम्मीद है। यह निर्णय ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की सहमति के बाद लिया गया है, जो वैश्विक तेल परिवहन के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है।