भारत-चीन संबंधों में नया मोड़: सीपीसी प्रतिनिधिमंडल का दौरा
भारत और चीन के बीच कूटनीतिक संबंधों में बदलाव
भारत और चीन के बीच लंबे समय से चल रहे सीमा विवाद के बीच, हाल ही में कूटनीतिक संबंधों में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला है। चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी (CPC) का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल हाल ही में भारत आया और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं के साथ महत्वपूर्ण वार्ताएं कीं।
सीपीसी प्रतिनिधिमंडल की बैठकें
सोमवार को, सीपीसी के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय जनता पार्टी के मुख्यालय का दौरा किया। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व सीपीसी के अंतरराष्ट्रीय विभाग की उप मंत्री सन हयान ने किया। भाजपा के विदेश मामलों के प्रभारी विजय चौथाईवाले ने बताया कि इस बैठक में भाजपा महासचिव अरुण सिंह के नेतृत्व में एक दल ने भाजपा और सीपीसी के बीच संवाद को बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की।
भारत में चीन के राजदूत की उपस्थिति
भारत में चीन के राजदूत शु फीहोंग भी इस प्रतिनिधिमंडल के साथ थे। चौथाईवाले के अनुसार, यह दौरा दोनों देशों के प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच संवाद और सहयोग को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
2000 के दशक से संपर्क का इतिहास
ऐतिहासिक दृष्टि से, बीजेपी और सीपीसी के बीच संपर्क कोई नई बात नहीं है। 2000 के दशक के अंत से दोनों दलों के बीच संवाद होता रहा है, जिसमें बीजेपी के प्रतिनिधिमंडलों की चीन यात्रा और भारत में पारस्परिक बैठकें शामिल हैं। हालांकि, 2020 में गलवान संघर्ष के बाद यह संवाद लगभग ठप हो गया था।
भारत-चीन संबंधों में सुधार के संकेत
प्रतिनिधिमंडल की बैठकें भारत की सत्ताधारी पार्टी के अधिकारियों के साथ हुईं। यह दौरा भारत-चीन संबंधों में एक नई नरमी के बीच हुआ है, जो वर्षों से सीमा तनाव के कारण प्रभावित थे। अक्टूबर 2024 में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच पहली औपचारिक द्विपक्षीय बैठक हुई, जिसने कई समझौतों का मार्ग प्रशस्त किया।
भरोसा पुनर्निर्माण के प्रयास
इसके बाद, दोनों पक्षों ने विश्वास पुनर्निर्माण के लिए ठोस कदम उठाए हैं। 2025 में कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू होने की योजना है, जो 2020 से निलंबित थी। इसके अलावा, चीन और भारत के बीच सीधी उड़ानें भी फिर से शुरू हो गई हैं।
उच्च-स्तरीय मुलाकातों का सिलसिला
2025 में, दोनों देशों के बीच उच्च-स्तरीय मुलाकातों की भरमार रही। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर, NSA अजीत डोभाल, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और प्रधानमंत्री मोदी ने चीन में SCO बैठकों में भाग लिया।