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भारत के विदेश मंत्री जयशंकर की खाड़ी देशों की यात्रा: कतर में महत्वपूर्ण बैठकें

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कतर में प्रधानमंत्री अल-थानी से मुलाकात की, जहां ऊर्जा, व्यापार और रणनीतिक साझेदारी पर चर्चा की गई। यह यात्रा अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के प्रयासों के बीच हो रही है। जयशंकर ने भारतीय समुदाय की सुरक्षा पर भी ध्यान दिया और उनकी सराहना की। आगे की योजनाओं में न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के अभियान की शुरुआत शामिल है।
 

जयशंकर की कतर यात्रा

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 5 से 10 जुलाई तक खाड़ी देशों की यात्रा के पहले चरण में कतर का दौरा किया। रविवार को, उन्होंने कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल-थानी से मुलाकात की। इस उच्च स्तरीय वार्ता में ऊर्जा, व्यापार, निवेश और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर गहन चर्चा हुई।


जयशंकर का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के प्रयासों के बाद पश्चिम एशिया में राजनीतिक स्थिति तेजी से बदल रही है।


भारतीय समुदाय की सुरक्षा पर चर्चा

कतर में भारतीय समुदाय की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए जयशंकर ने कतर के प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने 'एक्स' पर साझा किया, "हमने द्विपक्षीय सहयोग के विभिन्न पहलुओं, जैसे ऊर्जा, व्यापार, निवेश, संपर्क, सुरक्षा और दोनों देशों के बीच संबंधों की समीक्षा की। साथ ही, रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के नए अवसरों पर भी चर्चा की।"


उन्होंने अल-थानी के साथ पश्चिम एशिया के संघर्षों और उनके प्रभावों पर भी विचार-विमर्श किया।


भारतीय समुदाय के योगदान की सराहना

जयशंकर ने भारतीय समुदाय के अनुभवों और सुझावों की सराहना की, जो भारत-कतर साझेदारी को मजबूत बनाने में सहायक हैं। अपनी यात्रा के दौरान, वे खाड़ी क्षेत्र के चार देशों के नेताओं से मिलेंगे और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के साथ-साथ क्षेत्रीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे।


ईरान में युद्धविराम के प्रयासों में कतर और ओमान भी मध्यस्थता कर रहे हैं।


अगले चरण की योजनाएँ

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के बाद, अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता दोहा में जारी रहेगी। जयशंकर 13 जुलाई को न्यूयॉर्क जाएंगे, जहां वे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के आधिकारिक अभियान की शुरुआत करेंगे।


इसके बाद, वे 14-15 जुलाई को ब्रसेल्स में भारत-यूरोपीय संघ व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद की बैठक में भाग लेंगे।