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भारत के लिए प्रोजेक्ट कुशा: एक नई सुरक्षा क्रांति

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने प्रोजेक्ट कुशा एयर डिफेंस सिस्टम को भारत की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। इस स्वदेशी सिस्टम की विशेषताएँ और इसकी प्रभावशीलता पर चर्चा करते हुए, उन्होंने इसे एक गेम-चेंजर करार दिया। प्रोजेक्ट कुशा, जो रूस के S-400 का मुकाबला करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, में तीन इंटरसेप्टर वेरिएंट शामिल हैं। जानें इस सिस्टम के बारे में और कैसे यह भारत के डिफेंस इकोसिस्टम में बदलाव ला रहा है।
 

रक्षा मंत्री का महत्वपूर्ण बयान

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को भारत की सुरक्षा के लिए स्वदेशी "प्रोजेक्ट कुशा" एयर डिफेंस सिस्टम को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने इसकी सुरक्षा क्षमता की तुलना पौराणिक गोवर्धन पर्वत से की। हैदराबाद में DRDL (DRDO) के एडवांस्ड वेपन सिस्टम कॉम्प्लेक्स के उद्घाटन समारोह में बोलते हुए, उन्होंने इस सिस्टम के रणनीतिक महत्व पर जोर दिया और कहा कि यह प्रोजेक्ट भारत की सुरक्षा स्थिति में एक गेम-चेंजर साबित होगा।


प्रोजेक्ट कुशा की विशेषताएँ

प्रोजेक्ट कुशा एक स्वदेशी, लंबी दूरी का सरफेस-टू-एयर मिसाइल (SAM) डिफेंस सिस्टम है, जिसे DRDO द्वारा विकसित किया जा रहा है। यह रूस के S-400 के मुकाबले के लिए डिज़ाइन किया गया है और इसमें स्टील्थ एयरक्राफ्ट, ड्रोन और हाइपरसोनिक हथियारों से सुरक्षा के लिए तीन इंटरसेप्टर वेरिएंट शामिल हैं, जिनकी रेंज 150 किमी, 250 किमी और 400 किमी है। इसे 2028-2030 के बीच ऑपरेशनल रूप से तैनात करने की योजना है।


ऑपरेशन सिंदूर में प्रभावशीलता

राजनाथ सिंह ने बताया कि इस सिस्टम ने "ऑपरेशन सिंदूर" के दौरान अपनी प्रभावशीलता साबित की है, जो 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद शुरू किया गया था। उन्होंने कहा कि यह एक विश्व-स्तरीय स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम है, जिसने उस समय पूरे क्षेत्र को सुरक्षा कवच प्रदान किया।


डिफेंस इकोसिस्टम में बदलाव

रक्षा मंत्री ने बताया कि देश के डिफेंस इकोसिस्टम में बड़ा बदलाव आ रहा है। उन्होंने कहा कि DRDO की लैबोरेटरी, डिफेंस पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग, प्राइवेट इंडस्ट्री, स्टार्टअप, MSME और एकेडेमिया पहले से कहीं अधिक तालमेल के साथ काम कर रहे हैं। यह मिलकर काम करने का मॉडल भारत के सफर को तेज़ करेगा।


वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य

सिंह ने कहा कि दुनिया अस्थिरता और उथल-पुथल से गुजर रही है, जहाँ संघर्ष और युद्ध जैसे हालात बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे माहौल में, किसी देश को अपनी सुरक्षा और हितों की रक्षा के लिए मज़बूती और डेटरेंस की आवश्यकता है।


ग्लोबल वॉरफेयर में बदलाव

रक्षा मंत्री ने बताया कि ग्लोबल वॉरफेयर तेजी से बदल रहा है, जिसमें AI, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और एडवांस्ड सेंसर टेक्नोलॉजी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि 'कुशा' जैसे प्रोग्राम देश के लोगों में भरोसा जगाते हैं और उन्हें यकीन दिलाते हैं कि हम अपनी तैयारी में कोई कमी नहीं आने देंगे।