भारत के बुनियादी ढांचे पर चर्चा: मंत्री गडकरी ने उठाए महत्वपूर्ण मुद्दे
नई दिल्ली में हुए इंफ्रास्ट्रक्चर सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बुनियादी ढांचे से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने परियोजनाओं में देरी, गुणवत्ता की कमी और तकनीक के उपयोग पर जोर दिया। गडकरी ने कहा कि यदि बुनियादी समस्याओं का समय पर समाधान किया जाए, तो परियोजनाओं की लागत और समय को नियंत्रित किया जा सकता है। एसोचैम के अध्यक्ष ने भी भारत की आर्थिक प्रगति की दिशा में सकारात्मक संकेत दिए। जानें इस सम्मेलन में और क्या चर्चा हुई।
Apr 28, 2026, 18:50 IST
इंफ्रास्ट्रक्चर सम्मेलन में बुनियादी मुद्दों पर चर्चा
नई दिल्ली में आयोजित इंफ्रास्ट्रक्चर सम्मेलन और अचीवर्स अवार्ड्स 2026 में देश के बुनियादी ढांचे से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर गहन विचार-विमर्श हुआ। एसोचैम द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जहां उन्होंने परियोजनाओं में देरी और बढ़ती लागत के कारणों पर अपने विचार साझा किए।
परियोजनाओं में देरी के कारण
अपने संबोधन में गडकरी ने कहा कि निर्णय लेने में देरी, कमजोर योजना और जवाबदेही की कमी परियोजनाओं के समय पर पूरा न होने के प्रमुख कारण हैं। उन्होंने यह भी बताया कि भूमि अधिग्रहण जैसी समस्याएं और अनुमति में देरी भी बड़े आर्थिक नुकसान का कारण बनती हैं। यदि इन समस्याओं का समय पर समाधान किया जाए, तो परियोजनाओं की लागत और समय को नियंत्रित किया जा सकता है।
गुणवत्ता पर जोर
गडकरी ने गुणवत्ता के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि कई बार ठेकेदार घटिया काम करते हैं, लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती। उन्होंने कहा कि ऐसे ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर उन्हें काली सूची में डाला जाना चाहिए। केवल काम की मात्रा बढ़ाने पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि गुणवत्ता को समान महत्व देना आवश्यक है।
तकनीक का उपयोग
उन्होंने तकनीक के उपयोग पर बल देते हुए कहा कि निर्माण लागत कम करने के लिए नई तकनीकों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए, लेकिन गुणवत्ता से समझौता नहीं होना चाहिए। कचरे से ऊर्जा उत्पादन, नए निर्माण सामग्री का उपयोग और नवाचार को अपनाना भविष्य के लिए आवश्यक है।
सुधार की आवश्यकता
गडकरी ने कहा कि पूर्णता प्राप्त करना संभव नहीं है, लेकिन निरंतर सुधार के प्रयास किए जा सकते हैं। उन्होंने सभी हितधारकों से आग्रह किया कि वे मिलकर अपने कार्यों की समीक्षा करें और सुधार के उपाय तलाशें। नीति निर्धारकों को सार्थक सुझाव देने के लिए यह प्रक्रिया लगातार चलती रहनी चाहिए।
गुणवत्ता की अनिवार्यता
केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि कई बार बिना उचित विस्तृत परियोजना रिपोर्ट और पर्याप्त परीक्षण के निविदाएं जारी कर दी जाती हैं, जिससे सड़कों और पुलों की गुणवत्ता प्रभावित होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी परियोजना में गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए।
आर्थिक प्रगति की दिशा में
सम्मेलन के अध्यक्षीय संबोधन में एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल के. मिंडा ने कहा कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद भारत मजबूती से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत जल्द ही दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा।
बुनियादी ढांचे का महत्व
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क तेजी से विस्तार कर रहा है और बहु-माध्यमीय एकीकरण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सुरंग निर्माण और उन्नत तकनीकों का उपयोग सुरक्षा बढ़ा रहा है और संचालन को अधिक कुशल बना रहा है।
धन्यवाद प्रस्ताव
कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद प्रस्ताव रखते हुए एसोचैम के महासचिव सौरभ सान्याल ने कहा कि बुनियादी ढांचा केवल सड़कों और पुलों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आर्थिक परिवर्तन की रीढ़ है। उन्होंने कहा कि भारत इस समय एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है, जहां गति, पैमाना और स्थायित्व को एक साथ लाना आवश्यक है।
संवाद और चुनौतियाँ
सम्मेलन के विभिन्न सत्रों का संचालन अशुतोष चांदवार ने किया और उद्योग तथा सरकार के बीच संवाद आर.के. पांडेय द्वारा संचालित किया गया। इन चर्चाओं में यह स्पष्ट हुआ कि केवल महत्वाकांक्षी योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर भी ध्यान देना जरूरी है।