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भारत के टैंकरों पर हमले के बाद ईरान से कड़ी प्रतिक्रिया

मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के बीच, भारत के झंडे वाले दो टैंकरों पर हमले के बाद नई दिल्ली ने ईरान के राजदूत से स्पष्टीकरण मांगा है। ईरान के प्रतिनिधि ने इस घटना की जानकारी से इनकार करते हुए भारत-ईरान संबंधों को मजबूत बताया। इस घटना के बाद भारत ने ईरान के राजदूत को तलब किया और औपचारिक विरोध दर्ज कराया। जानें इस घटनाक्रम के पीछे की पूरी कहानी और दोनों देशों के बीच संबंधों पर इसके प्रभाव के बारे में।
 

भारत और ईरान के बीच तनाव

मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच, भारत के झंडे वाले दो टैंकरों पर हमले के बाद नई दिल्ली ने ईरान के राजदूत से स्पष्टीकरण मांगा है। यह घटना होर्मुज स्ट्रेट में हुई, जहां भारत और ईरान के संबंधों को लेकर चिंता बढ़ गई है। ईरान के सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि ने इस घटना की जानकारी से इनकार किया है, यह कहते हुए कि दोनों देशों के बीच संबंध मजबूत हैं।


ईरानी प्रतिनिधि का बयान

तेहरान के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा कि उन्हें इस घटना के बारे में कोई जानकारी नहीं है और भारत-ईरान संबंधों को 'बहुत मजबूत' बताया। उन्होंने यह भी कहा कि भारत को इन संबंधों से लाभ हुआ है, खासकर जब उसके तेल टैंकर होर्मुज से गुजरते हैं।


शांति की अपील

हैदराबाद में इलाही ने कहा, "हम युद्ध के पक्ष में नहीं हैं, बल्कि शांति के पक्ष में हैं।" उन्होंने उम्मीद जताई कि यह मामला जल्द सुलझ जाएगा।


हमले की जानकारी

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान की नौसेना ने भारतीय टैंकरों 'जग अर्णव' और 'सनमार हेराल्ड' पर गोलीबारी की। ये टैंकर इराकी तेल ले जा रहे थे। इस घटना के बाद भारत ने ईरान के राजदूत को तलब किया और औपचारिक विरोध दर्ज कराया।


विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया

भारत के विदेश मंत्रालय ने इस घटना पर चिंता व्यक्त की और ईरानी राजदूत से अनुरोध किया कि वे भारत का दृष्टिकोण ईरान के अधिकारियों तक पहुंचाएं। विदेश सचिव ने यह भी याद दिलाया कि ईरान ने पहले भी भारतीय जहाजों को सुरक्षित मार्ग प्रदान किया है।